लोग अक्सर इंसोम्निया को सिर्फ़ नींद न आने की बीमारी समझते हैं, लेकिन इसके कई अलग-अलग रूप होते हैं। कुछ लोगों को सोने में दिक्कत होती है, कुछ लोग सुबह जल्दी उठ जाते हैं, और कुछ लोग आधी रात को जाग जाते हैं। नींद न आने की इस दिक्कत को मेंटेनेंस इंसोम्निया कहते हैं। आइए इसके कारणों और वजहों को समझते हैं।
स्ट्रेस और एंग्जायटी
मेंटेनेंस इंसोम्निया के सबसे आम कारण स्ट्रेस और एंग्जायटी हैं। आधी रात को अचानक जागना रोज़ के कामों, काम के स्ट्रेस या नींद न आने के स्ट्रेस की वजह से हो सकता है। बुरे सपने, PTSD या मेंटल हेल्थ से जुड़ी दिक्कतें भी इंसोम्निया की वजह बन सकती हैं।
शरीर में दर्द
इंसोम्निया सीधे दर्द से जुड़ा है, जिससे नींद में दिक्कत आ सकती है। पुरानी दिक्कतों के साथ-साथ, पीठ दर्द जैसी कुछ समय की दिक्कतें भी इंसोम्निया की वजह बन सकती हैं।
उम्र और जेंडर
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, न्यूरोपैथी, यूरिनरी प्रॉब्लम और एसिड रिफ्लक्स जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं और इंसोम्निया की वजह बन सकती हैं। USA में 2015 में हुई एक स्टडी से पता चला कि मेनोपॉज़ के करीब पहुँच रही महिलाओं में हार्मोनल बदलावों की वजह से मेंटेनेंस इंसोम्निया होने का खतरा ज़्यादा होता है।
नींद के लिए सही माहौल नहीं
कभी-कभी, आस-पास का माहौल नींद में खलल डाल सकता है, जैसे बहुत ज़्यादा शोर, रोशनी, ठंड या गर्मी, आरामदायक बिस्तर, या पार्टनर के ज़ोर से खर्राटे लेना।
इलाज के ऑप्शन
अनिद्रा के लिए कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT-I): यह सोचने के तरीके, आदतों और व्यवहार का पता लगाती है। इसमें आमतौर पर छह से आठ सेशन होते हैं।
दवाएँ: आपका डॉक्टर मरीज़ की हालत के आधार पर कुछ समय के लिए दवा लेने की सलाह दे सकता है।
सोने से पहले का सही रूटीन: सोने से पहले का आपका रूटीन आरामदायक होना चाहिए। सोने से 30-60 मिनट पहले डिजिटल डिवाइस बंद कर दें। आप गहरी साँस लेने और मसल्स को आराम देने की टेक्नीक भी आज़मा सकते हैं।
इससे बचें:
देर शाम को कॉफ़ी या एनर्जी ड्रिंक जैसी कैफ़ीन वाली ड्रिंक्स पीने से नींद न आने की समस्या और बढ़ सकती है।
दिन में झपकी लेने से बचें। इससे आपके सोने-जागने का साइकिल बिगड़ सकता है।








