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जीएसटी रेट कटौती ने बढ़ाई देश भर में खरीदारी, नवरात्रि की बिक्री पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी खपत में से एक बनी

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नई दिल्ली, 18 अक्टूबर (आईएएनएस) । उद्योग के अनुमानों के अनुसार, जीएसटी दरों में हालिया कटौती ने देश भर में खरीदारी में तेजी ला दी है, जिससे ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और ई-कॉमर्स क्षेत्र में नवरात्रि की बिक्री पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी खपत में से एक बन गई है।

विश्लेषकों ने त्योहारी और शादी-ब्याह के मौसम में कारोबार 7 लाख करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान लगाया है।

उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, जीएसटी बचत का लाभ उठाने के लिए खरीदारों की होड़ के कारण डिजिटल पेमेंट रातोंरात दस गुना बढ़कर 21 सितंबर के 1.18 लाख करोड़ रुपए से 22 सितंबर को 11.31 लाख करोड़ रुपए हो गया।

दिल्ली में त्योहारी बिक्री 75,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि अहमदाबाद में 2,500 रुपए से कम कीमत वाले कपड़ों पर जीएसटी में कटौती के बाद सूती कपड़े की मांग में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

जीएसटी सुधारों से ऑटोमोटिव और कंज्यूमर ड्यूरेबल के क्षेत्र को भारी बढ़ावा मिला।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने नवरात्रि में ऑटो बिक्री में सालाना आधार पर 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो अब तक की सबसे अधिक वृद्धि है।

मारुति सुजुकी इंडिया ने पिछले साल की तुलना में अपनी बिक्री दोगुनी कर दी और आठ दिनों में 1,65,000 कारों की डिलीवरी की, जिसमें अष्टमी पर रिकॉर्ड 30,000 वाहन शामिल हैं, जबकि दोपहिया वाहन निर्माताओं के शोरूम में ग्राहकों की संख्या दोगुनी हो गई।

उद्योग के अनुमानों के अनुसार, प्रीमियम उत्पाद श्रेणियों के कारण कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की बिक्री में 40-45 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सभी प्रमुख उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांडों और डीलरों ने दोहरे अंकों में मजबूत वृद्धि देखी।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी त्योहारी जीएसटी कटौती के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक बनकर उभरे, क्योंकि अमेजन इंडिया ने महानगरीय क्षेत्रों में उसी दिन और अगले दिन डिलीवरी में 29 प्रतिशत और टियर-2 और टियर-3 शहरों में दो-दिवसीय डिलीवरी में 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेंटीमेंट ने उपभोक्ता गति को दर्शाया और निफ्टी 50 मजबूत विदेशी निवेश, मजबूत रुपए और त्योहारी मांग के समर्थन से 52-सप्ताह के उच्च स्तर 25,709 पर पहुंच गया।

आवश्यक और उपभोक्ता वस्तुओं पर कम करों ने घरेलू बजट को आसान बनाया है और लोकल सप्लाई चेन को एक्टिव कर दिया, जिससे बाज़ारों में भारत में निर्मित उत्पादों को बढ़ावा मिला है।

–आईएएनएस

एसकेटी/

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