Home खेल तैराकी: नदियों-झीलों को पार करने की कला, जिसकी मदद से मिले ओलंपिक...

तैराकी: नदियों-झीलों को पार करने की कला, जिसकी मदद से मिले ओलंपिक पदक

1
0

नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। प्रागैतिहासिक काल में नदियों और झीलों को पार करने के लिए मानव जाति ने तैराकी की शुरुआत की थी। मिस्र की पाषाण युग की गुफाओं में भी भित्तिचित्र के जरिए मनुष्यों को तैरते हुए दिखाया गया है। ग्रीक पौराणिक कथाओं के साथ महाभारत और रामायण में भी तैराकी का उल्लेख देखने को मिलता है।

तैराकी एक ऐसा लोकप्रिय जलक्रीड़ा है जिसमें तैराक पानी में गति और सहनशक्ति के साथ विभिन्न तकनीकों का उपयोग करते हैं। इससे न सिर्फ शरीर मजबूत बनता है, बल्कि फेफड़ों की क्षमता भी बढ़ती है।

19वीं सदी की शुरुआत में ग्रेट ब्रिटेन की नेशनल स्विमिंग सोसाइटी ने तैराकी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया, जिसमें अधिकतर तैराक ब्रेस्टस्ट्रोक का इस्तेमाल करते थे।

1880 के दशक में फ्रेडरिक कैविल नामक तैराक ने दक्षिणी महासागर की यात्रा की, जहां उन्होंने वहां के लोगों को फ्लटर किक के साथ क्रॉल करते देखा। इसके बाद कैविल ऑस्ट्रेलिया में बस गए। यहां उन्होंने तैराकों को स्ट्रोक की ट्रेनिंग दी, जो ऑस्ट्रेलियाई क्रॉल के नाम से जाना गया।

तैराकी 1896 ओलंपिक के बाद से प्रत्येक ओलंपिक खेल का हिस्सा रही है। साल 1912 में इसमें महिलाओं की प्रतियोगिता भी शुरू हुई। 2020 टोक्यो ओलंपिक में इसमें मिक्स्ड मेडल रिले की शुरुआत हुई।

तैराकी में फ्रीस्टाइल, बैकस्ट्रोक, ब्रेस्टस्ट्रोक, और बटरफ्लाई जैसे चार स्ट्रोक होते हैं। फ्रीस्टाइल, ब्रेस्टस्ट्रोक, बटरफ्लाई, और आईएम इवेंट्स में तैराक ऊंचाई पर स्थित प्लेटफॉर्म से पानी में गोता लगाते हैं। वहीं, बैकस्ट्रोक में तैराक स्टार्टिंग ब्लॉक से रेस शुरू करते हैं। इस दौरान उन्हें पूल की दीवार को छूना होता है। अगर कोई खिलाड़ी सिग्नल से पहले पूल में गोता लगा ले, तो उसे अयोग्य करार दिया जाता है।

रिले रेस के दौरान जब पानी में मौजूद एक तैराक दूसरे को छू ले, तभी अगला तैराक पानी में छलांग लगाकर तैराकी शुरू कर सकता है। ओलंपिक में स्विमिंग पूल 50 मीटर लंबा होता है, जिसे कुल 8 लेन में विभाजित किया जाता है। पेशेवर तैराक 50 (लॉन्ग कोर्स) या 25 मीटर (शॉर्ट कोर्स) में हिस्सा लेते हैं।

ओलंपिक की बात की जाए तो इसमें सिर्फ लॉन्ग कोर्स इवेंट ही होते हैं। इसमें सबसे छोटी व्यक्ति स्पर्धा 50 मीटर फ्रीस्टाइल है, जबकि बैकस्ट्रोक, बटरफ्लाई, और ब्रेस्टस्ट्रोक की सबसे छोटी स्पर्धा 100 मीटर की होती है।

इसके अलावा, मैराथन स्विमिंग में नदियों, झीलों या फिर समुद्र में लंबी दूरी की प्रतिस्पर्धा होती है।

ओलंपिक में तैराकी के खेल में भारत का भविष्य संभावनाओं से भरा है। हालिया वर्षों में युवा तैराकों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा है। आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं, विदेशी कोचिंग, और सरकार और फेडरेशन के सपोर्ट से खिलाड़ी इस खेल में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उम्मीद है कि भारत जल्द पदक की दौड़ में शामिल हो सकता है।

–आईएएनएस

आरएसजी/डीकेपी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here