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थेरेपी बन गई कुकिंग, मास्टरशेफ के सेट पर कंटेस्टेंट को देख भावुक हुए जज

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मुंबई, 8 जनवरी (आईएएनएस)। टीवी के पॉपुलर शो ‘मास्टरशेफ इंडिया’ के 9वें सीजन का आगाज हो चुका है। अभी शो के ऑडिशन चल रहे हैं, जिसमें एक से बढ़कर एक हुनरबाज लोगों को देखा जा रहा है।

अब शो में ऐसी जोड़ी की एंट्री हुई है, जिनके हुनर को देखकर तीनों जज खुद को एप्रन देने से नहीं रोक पाए और सेट पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। शो में जहां सिर्फ अच्छे खाने की तलाश की जा रही है, वहीं इसी के साथ लोगों की संघर्ष की कहानी फैंस और जजों को रोने पर मजबूर कर रही है।

‘मास्टरशेफ इंडिया’ का नया प्रोमो सामने आया है, जिसमें एक ऐसे कंटेस्टेंट को देखा गया है जो मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है, लेकिन किचन में कुकिंग करते ही, वे अपनी सारी कमजोरियों पर काबू पा लेती हैं। हम बात कर रहे हैं मनीषा की, जो 14 साल की उम्र में कोमा में चली गई थीं और हैवी डोज की दवाएं लेने की वजह से सेकेंडरी पार्किंसन से ग्रस्त हो गईं।

इस बीमारी में मांसपेशियां कठोर हो जाती हैं और शरीर अपने आप कांपने लगता है। ऐसे में मरीज का अपने शरीर पर काबू पाना मुश्किल होता है। दूसरी तरफ मनीषा जैसे ही मास्टर शेफ की किचन में खाना बनाती है, वे अपने पूरे शरीर पर काबू पा लेती हैं और थोड़ी मेहनत और पूरी लगन से बेहतरीन डिश तैयार करती हैं।

मनीषा की हिम्मत और मेहनत देखकर रणवीर बरार, कुणाल कपूर और विकास खन्ना खुद के आंसू नहीं रोक पाते और खाना चखने के बाद जीत का एप्रन मनीषा को पहनाते हैं। जज रणवीर बरार, मनीषा की हिम्मत से इतने ज्यादा इंस्पायर होते हैं कि वे मनीषा के लिए एक कविता भी सुनाते हैं।

मनीषा प्रोमो में बताती है कि वे कुकिंग को थेरेपी मानती हैं, क्योंकि ये काम करते वक्त सिर्फ वे खाने के स्वाद को बढ़ाने पर फोकस रखती हैं और शरीर खुद शांत हो जाता है।

शो 5 जनवरी से सोनी टीवी पर टेलीकास्ट हो रहा है और जल्द ही सभी कंटेस्टेंट के बीच दूसरा राउंड ‘अग्निपरीक्षा’ भी होने वाला है। शो की थीम इस बार देश के देसी खाने को नया रूप देने की रखी गई है, जिसमें सभी कंटेस्टेंट देसी खाने के साथ एक्सपेरिमेंट करते दिखेंगे।

–आईएएनएस

पीएस/एबीएम

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