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देश में हर तीसरा UPI लेनदेन असुरक्षित, क्योंकि Google Pay ने सरकारी फ्रॉड सुरक्षा टूल नहीं अपनाया – DoT की रिपोर्ट

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भारत में डिजिटल पेमेंट का दायरा तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ साइबर धोखाधड़ी के खतरे भी बढ़े हैं। हाल ही में दूरसंचार विभाग (DoT) की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि देश में हर तीन में से एक UPI लेनदेन अब भी फ्रॉड सुरक्षा तंत्र से बाहर है। इसका कारण यह है कि Google Pay ने सरकार के Fraud Risk Indicator (FRI) टूल को अभी तक अपने सिस्टम में लागू नहीं किया है।

क्या है Fraud Risk Indicator (FRI)?

FRI एक तकनीकी टूल है जिसे DoT ने विकसित किया है ताकि मोबाइल नंबरों और खातों को उनके धोखाधड़ी के जोखिम स्तर के अनुसार वर्गीकृत किया जा सके। यह टूल किसी लेनदेन से पहले बताता है कि सामने वाला नंबर या अकाउंट “लो”, “मीडियम” या “हाई रिस्क” श्रेणी में आता है या नहीं। अगर रिस्क ज्यादा है तो लेनदेन को रोका जा सकता है या यूजर को चेतावनी दी जाती है। इसका मकसद ऑनलाइन पेमेंट्स में बढ़ते फिशिंग और स्कैम्स से लोगों को बचाना है।

Google Pay पर सवाल

DoT अधिकारियों के अनुसार, Google Pay देश के कुल UPI लेनदेन का लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। लेकिन इसने अभी तक FRI को लागू नहीं किया है। इसका मतलब है कि करोड़ों लेनदेन हर महीने बिना किसी सरकारी फ्रॉड सुरक्षा जांच के पूरे हो रहे हैं।
Google India के पब्लिक पॉलिसी हेड राजेश रंजन ने बताया कि कंपनी DoT के साथ FRI को लागू करने पर चर्चा कर रही है, लेकिन फिलहाल यह इंटीग्रेशन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि Google के पास पहले से ही अपनी AI आधारित धोखाधड़ी रोकथाम प्रणाली ‘DigiKavach’ मौजूद है, जो संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने का काम करती है।

दूसरी कंपनियों ने अपनाया सुरक्षा सिस्टम

इसके विपरीत, PhonePe और Paytm जैसी अन्य प्रमुख UPI कंपनियों ने FRI टूल को अपने सिस्टम में शामिल कर लिया है। DoT के मुताबिक, इस टूल की मदद से इन कंपनियों ने करोड़ों रुपए की संभावित धोखाधड़ी को रोका है। PhonePe ने अब तक लगभग ₹125 करोड़, जबकि Paytm ने ₹68 करोड़ के घोटाले से ग्राहकों को बचाया है।

RBI का निर्देश और बढ़ता साइबर खतरा

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जून 2025 में सभी बैंकों और भुगतान कंपनियों को FRI सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया था। RBI का कहना है कि यह कदम देश में डिजिटल वित्तीय लेनदेन की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
DoT के अनुसार, 2022 में जहां देश में लगभग 10.29 लाख साइबर फ्रॉड मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा 22.68 लाख तक पहुंच गया। सरकार अब तक लगभग 9.4 लाख सिम कार्ड और 2.6 लाख IMEI नंबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में ब्लॉक कर चुकी है।

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