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नारायणपुर में बड़ी सफलता: मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने बरामद किए भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक

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बस्तर संभाग में चल रहे माओवादी विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी उपलब्धि मिली है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ के दुर्गम जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने माओवादियों का भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा बरामद किया है।

अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षाबलों को लंबे समय से अबूझमाड़ इलाके में माओवादियों की गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। इसी आधार पर एक संयुक्त टीम को ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। मुठभेड़ के बाद क्षेत्र की सघन तलाशी ली गई, जिसमें लाइट मशीनगन (एलएमजी), एके-47 (त्रिची), इंसास राइफल, सेल्फ लोडिंग राइफल (एसएलआर), स्टेन गन, 51 मिमी मोर्टार, बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल), 9 मिमी पिस्टल, देशी कट्टा और 12 बोर बंदूक सहित 300 से अधिक हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।

बरामद किए गए हथियारों की संख्या और किस्म यह दर्शाती है कि माओवादी इस क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की योजना बना रहे थे। सुरक्षाबलों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण संभावित घटना को टालने में सफलता मिली। अधिकारियों ने बताया कि इस ऑपरेशन से माओवादियों को बड़ा झटका लगा है और उनकी संगठनात्मक गतिविधियों पर रोक लगेगी।

सूत्रों के मुताबिक, अबूझमाड़ का इलाका माओवादियों का गढ़ माना जाता है। घने जंगल और दुर्गम पहाड़ियां माओवादियों को छिपने और हथियारों को जमा करने के लिए सुरक्षित ठिकाना प्रदान करती हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों को अक्सर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद हाल के महीनों में सुरक्षाबलों ने कई बार सफलता हासिल की है और यह ऑपरेशन उन उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

स्थानीय पुलिस और अर्धसैनिक बलों का कहना है कि बरामद हथियारों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन्हें किन घटनाओं में इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, इस बात की भी जांच होगी कि माओवादी इन्हें कहां से और कैसे जुटा रहे थे।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बरामदगी न केवल माओवादियों की सैन्य ताकत को कमजोर करती है, बल्कि क्षेत्र में उनके नेटवर्क को भी ध्वस्त करती है। जब लगातार हथियार और विस्फोटक जब्त होते हैं, तो इससे माओवादियों के मनोबल पर गहरा असर पड़ता है और सुरक्षा बलों का विश्वास और बढ़ता है।

नारायणपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में इस अभियान की चर्चा जोर-शोर से हो रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में उम्मीद बढ़ती है। हालांकि, अभी भी कई इलाकों में माओवादियों की गतिविधियाँ बनी हुई हैं, जिन्हें जड़ से खत्म करने के लिए और सघन अभियान चलाने की आवश्यकता है।

फिलहाल सुरक्षाबलों ने बरामद हथियारों को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। इस बड़ी सफलता को पूरे बस्तर संभाग के लिए माओवाद विरोधी अभियान में अहम पड़ाव माना जा रहा है।

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