जब आर्थिक संकट अचानक दस्तक देता है — चाहे नौकरी छूटने की वजह से हो या किसी गंभीर बीमारी के कारण — तब सबसे बड़ी चिंता होती है हर महीने की किस्त यानी EMI भरना। ऐसे में लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) एक अस्थायी राहत के तौर पर सामने आता है। यह आपको कुछ महीनों के लिए EMI चुकाने से रोकने की अनुमति देता है, ताकि आप अपनी वित्तीय स्थिति को संभाल सकें। लेकिन ध्यान रहे, यह किसी भी तरह की मुफ्त छूट नहीं है, बल्कि सिर्फ किस्त भरने की तारीख आगे बढ़ाने का मौका है। और हां, ब्याज (Interest) इस दौरान भी बढ़ता रहता है।
लोन मोरेटोरियम क्या है?
सरल भाषा में कहें तो लोन मोरेटोरियम एक पॉज़ बटन है, स्टॉप बटन नहीं। बैंक या वित्तीय संस्थान आपके EMI भुगतान को कुछ समय के लिए रोकने की अनुमति देते हैं, अगर आप अचानक आई कठिनाइयों से जूझ रहे हैं।
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इस दौरान आपकी देनदारी माफ नहीं होती, बस किस्त की तारीख टाल दी जाती है।
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ब्याज की घड़ी लगातार चलती रहती है और बाद में यह आपके लोन की कुल रकम में जुड़ जाता है।
छूट नहीं, बस टालना है भुगतान
यहां सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि मोरेटोरियम का मतलब लोन माफ होना है — ऐसा बिल्कुल नहीं है।
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छोटे समय के लिए राहत: कुछ महीने आपको EMI नहीं देनी होगी, जिससे तत्काल आर्थिक दबाव कम होता है।
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लंबे समय में बोझ बढ़ना तय: बाद में या तो आपकी EMI की रकम बढ़ जाएगी या लोन का समय बढ़ जाएगा। दोनों ही हालात में आपको कुल मिलाकर ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा।
कौन ले सकता है लोन मोरेटोरियम?
हर कोई सीधे इसका लाभ नहीं ले सकता। बैंक या NBFCs इसे चुनिंदा ग्राहकों को ही देते हैं, वह भी तब जब वे उचित कारण और दस्तावेज पेश करें।
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आपका लोन खाता स्टैंडर्ड होना चाहिए (आमतौर पर 90 दिन से ज्यादा की बकाया स्थिति में नहीं)।
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आपको आवेदन करना होगा और कारण साबित करने होंगे — जैसे नौकरी छूटने का लेटर, अस्पताल का बिल, या सैलरी स्लिप।
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हर केस की मंजूरी बैंक के विवेक पर निर्भर करती है।
EMI मोरेटोरियम लेने की प्रक्रिया
अगर आप EMI में अस्थायी छूट चाहते हैं, तो यह कदम उठाएं:
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अपने बैंक से संपर्क करें: अपनी स्थिति ईमानदारी से बताएं।
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दस्तावेज जमा करें: नौकरी छूटने, बीमारी या आय में कमी का सबूत दें।
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शर्तें समझें: ब्याज लगेगा या नहीं, EMI कितनी बढ़ेगी, लोन की अवधि कितनी होगी — ये सब लिखित में लें।
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स्मार्ट बातचीत करें: संभव हो तो EMI कम करवाएं या लोन अवधि बढ़वाएं।
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क्रेडिट स्कोर पर असर जानें: कुछ मोरेटोरियम में स्कोर पर असर नहीं पड़ता, लेकिन कुछ मामलों में पड़ सकता है।
एक बार मंजूरी मिलने के बाद, बैंक आपको नई EMI अनुसूची (Schedule) भेज देगा।
मोरेटोरियम के फायदे
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आर्थिक कठिनाई में तुरंत राहत
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लेट फीस या डिफॉल्टर की श्रेणी में जाने से बचाव
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आपातकालीन परिस्थितियों में मददगार (जैसे बीमारी, नौकरी छूटना, आय में कमी)
मोरेटोरियम के नुकसान
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ब्याज लगातार बढ़ता रहेगा
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EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है
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बड़े लोन (जैसे होम लोन) में ब्याज का बोझ बहुत बढ़ सकता है
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कुछ मामलों में क्रेडिट कार्ड लिमिट कम हो सकती है
क्या आपको EMI मोरेटोरियम लेना चाहिए?
यह फैसला सोच-समझकर लेना जरूरी है।
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अगर आप EMI भर सकते हैं: भरते रहें, क्योंकि इससे ब्याज का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
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अगर मजबूरी है: तभी मोरेटोरियम का विकल्प चुनें।
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होम लोन वालों के लिए चेतावनी: लोन के शुरुआती वर्षों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है, ऐसे में मोरेटोरियम लेने से लोन की लागत और ज्यादा बढ़ सकती है।
लोन EMI मोरेटोरियम एक तरह का आपातकालीन ब्रिज है, जो आपको मुश्किल वक्त पार करने में मदद करता है। लेकिन इसमें शर्तें जुड़ी होती हैं और लंबे समय में यह महंगा सौदा साबित हो सकता है। इसलिए निर्णय लेने से पहले:
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बैंक से विस्तार में बात करें
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कुल ब्याज और EMI बदलाव का हिसाब लगाएं
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अपने क्रेडिट स्कोर पर असर का आकलन करें
आर्थिक राहत जरूरी है, लेकिन सिर्फ अल्पकालिक आराम के लिए भविष्य में भारी बोझ उठाना समझदारी नहीं है। सही गणना और सोच-समझकर लिया गया फैसला ही आपको असली आर्थिक सुरक्षा दे सकता है।








