हिंद प्रशांत क्षेत्र के देशों में तनाव बढ़ता ही जा रहा है। यूक्रेन पर रूस के हमले और ताइवान पर कब्जे की चीन की जोरदार सैन्य तैयारी से हालात जंग की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद चीन और रूस दोनों एक हो गए हैं और शी जिनपिंग सरकार मास्को की खुलकर मदद कर रही है। चीन और रूस के बॉम्बर कई बार जापान सागर के ऊपर से उड़ान भर चुके हैं। चीन और रूस दोनों ही अमेरिका और उसके सहयोगी देशों जापान तथा दक्षिण कोरिया को डराने की कोशिश कर रहे हैं। चीन ने हाल ही में अपना विशाल नया एयरक्राफ्ट कैरियर भी पहली बार जापान के जलक्षेत्र में भेजा था। चीन और जापान के बीच सेनकाकू द्वीप को लेकर लंबे समय से विवाद है। जापान को डर है कि ताइवान पर कब्जे के बाद चीन सेनकाकू को भी हथिया सकता है। चीन की दादागिरी से जूझ रहे जापान की मदद के लिए दोस्त भारत खुलकर सामने आया है। भारत के रूसी सुखोई-30 फाइटर जेट जापान पहुंचे हैं।जापानी सेना ने एक बयान जारी करके बताया कि उन्होंने इस महीने अपने कोमात्सू एयर बेस पर भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट का स्वागत किया है। भारतीय विमान ने जापानी फाइटर जेट के साथ 5 और 6 नवंबर तक हवाई अभ्यास किया। इस दौरान भारतीय पायलट ने जापान का एफ-15 फाइटर जेट उड़ाया जो दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे को दिखाता है। भारतीय सुखोई जेट जापान- इंडिया डिफेंस पार्टनरशिप प्रोग्राम के तहत पहुंचा था। चीनी ड्रैगन की सैन्य तैयारी से जापान सतर्क हो गया है और बड़े पैमाने पर हथियार और मिसाइलें अमेरिका से खरीद रहा है।
भारतीय सुखोई से चीन को लगेगी मिर्ची
जापान का कोमात्सू एयरबेस जापानी वायुसेना के एफ-15 ईगल फाइटर जेट का अड्डा है। चीन अगर ताइवान या जापान पर कोई हमला करता है तो यह एयरबेस काफी अहम होगा। भारत और जापान के पायलटों ने हवाई खतरों से निपटने का अभ्यास किया। इस दौरान दुश्मन के इलाके में या लक्ष्यों पर सटीक हमले का भी अभ्यास किया गया। भारत के सुखोई-30 फाइटर जेट को रूस ने बनाया है। इसका रूसी वायुसेना भी जमकर इस्तेमाल करती है। वहीं चीन ने भी इसका कॉपी बनाया हुआ है। ऐसे में जापानी पायलटों को भी सुखोई की ताकत का अहसास हो गया। इससे वे भविष्य में चीन या रूस से होने वाली जंग में इस अनुभव का लाभ उठा सकेंगे। इसी वजह से चीन को भी भारत के सुखोई पहुंचने से मिर्ची लग सकती है।
वहीं भारतीय पायलटों को एफ-15 फाइटर जेट का अनुभव हुआ। अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है कि वह एफ-35 फाइटर जेट को खरीदे लेकिन अभी तक इसकी मंजूरी नहीं मिली है। माना जा रहा है कि भारत रूसी सुखोई-57 फाइटर जेट खरीद सकता है। भारत का सुखोई-30 जहां पर भारी बमों और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें ले जा सकता है, वहीं अमेरिकी एफ-15 जेट डॉग फाइट के लिए दुनिया में जाना जाता है। हाल के वर्षों में क्वॉड के सदस्य देश जापान और भारत के बीच एयरफोर्स से लेकर नेवी तक में काफी सहयोग बढ़ा है। भारतीय युद्धपोत भी पिछले दिनों जापान के दौरे पर गए थे। चीन को लगता है कि यह एक तरह से उसकी घेरेबंदी है।








