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यादों में जॉय: पहली फिल्म के ऑफर को ‘शागिर्द’ ने कह दिया था ‘ना’, दोबारा ‘हां’ कहने के पीछे दिलचस्प किस्सा

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मुंबई, 23 फरवरी (आईएएनएस)। सिनेमा जगत में ऐसे कई सितारे हुए जो आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, मगर उनका अंदाज, अभिनय और खास व्यक्तित्व उन्हें बेहतरीन फिल्मों के जरिए दर्शकों के बीच जिंदा रखा हुआ है। ऐसे ही अभिनेता थे ‘शागिर्द’ फेम जॉय मुखर्जी…रोमांटिक अंदाज, सुंदर चेहरे और हिट फिल्मों के लिए वह कइयों के चहेते बने।

24 फरवरी को 1960 के दशक के दिलकश नायक जॉय मुखर्जी की जयंती है। वे अपने रोमांटिक अंदाज, सुंदर चेहरे और हिट फिल्मों के लिए ‘दिल की धड़कन’ कहलाते थे। जॉय मुखर्जी का जन्म 24 फरवरी 1939 को झांसी में हुआ था। वे फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी के बेटे और अशोक कुमार के भांजे थे। बॉलीवुड के प्रसिद्ध मुखर्जी परिवार से ताल्लुक रखने वाले जॉय ने 1960 के दशक में कई सुपरहिट फिल्में दीं, जिनमें से ज्यादातर में ओ.पी. नैय्यर का संगीत था।

उनके पिता शशधर मुखर्जी झांसी से मुंबई आए थे और साउंड रिकॉर्डिस्ट बनने की बजाय बॉम्बे टॉकीज के मालिक हिमांशु रॉय के साझेदार बने। उन्होंने किस्मत, बंधन, झूला, अनारकली और नागिन जैसी क्लासिक फिल्में बनाईं। जॉय के मामा अशोक कुमार थे।

जॉय मुखर्जी की फिल्मों में आने की कहानी दिलचस्प है। उन दिनों जॉय के रिश्तेदार और अभिनेत्री रानी मुखर्जी के पिता राम मुखर्जी फिल्म ‘हम हिंदुस्तानी’ बना रहे थे, जो साल 1960 में रिलीज हुई थी। उस फिल्म में उन्हें सुनील दत्त के छोटे भाई का रोल ऑफर किया गया, लेकिन कॉलेज में कुश्ती, टेनिस और फुटबॉल में व्यस्त जॉय ने साफ मना कर दिया। इसके बाद मेकर्स ने रकम कई गुना बढ़ाकर उन्हें फिर से फिल्म में आने की पेशकश की। जब ऑफर की रकम 15 रुपए से बढ़कर 200 रुपए हो गई, तो जॉय को लगा कि इससे कॉलेज का जेब खर्च निकल आएगा। इस वजह से उन्होंने हामी भर दी। यह उनकी पहली फिल्म बनी, जिसमें मुख्य भूमिका में सुनील दत्त और आशा पारेख थे। जॉय को छोटा रोल मिला और उनकी हीरोइन हेलन थीं, क्योंकि कोई बड़ी अभिनेत्री तैयार नहीं हुई।

जॉय के करियर की असली शुरुआत लव इन शिमला से हुई, जिसे आर.के. नैय्यर ने निर्देशित किया था। इसमें जॉय ने साधना के साथ डेब्यू किया और यह फिल्म सुपरहिट रही। इस फिल्म से दोनों स्टार बन गए। इसके बाद जॉय ने कई हिट फिल्में कीं, जिनमें फिर वही दिल लाया हूं, लव इन टोक्यो, जिद्दी, एक मुसाफिर एक हसीना, शागिर्द, इशारा, आओ प्यार करें शामिल हैं।

इनमें से ज्यादातर फिल्मों में ओ.पी. नैय्यर का संगीत था। जॉय ने निर्देशन और निर्माण में भी हाथ आजमाना शुरू किया। उन्होंने साल 1968 में शर्मिला टैगोर और माला सिन्हा के साथ हमसाया, साल 1977 में राजेश खन्ना और जीनत अमान के साथ मिस बॉम्बे और छैला बाबू बनाईं। छैला बाबू उन्होंने खुद निर्देशित भी की, लेकिन ये फिल्में ज्यादा नहीं चलीं और आर्थिक मुश्किलों में घिर गए। लिहाजा बाद में उन्हें कुछ कमजोर फिल्मों जैसे एहसान, मुजरिम, आग और दाग, कहीं आर कहीं पार, और कहानी फूलन की में काम करना पड़ा।

9 मार्च 2012 को मुंबई में 73 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था।

–आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

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