US और इज़राइल मिलकर ईरान पर हमला कर रहे हैं, और ईरान भी जवाबी हमले कर रहा है। एक-दूसरे के मिलिट्री बेस और बंकरों को निशाना बनाया जा रहा है, और मिसाइलें और गोले दागे जा रहे हैं। हालांकि, ये हमले सिर्फ़ बमबारी और मिसाइल फायर तक ही सीमित नहीं हैं। ईरान पर US और इज़राइल से साइबर अटैक भी हो रहे हैं, जिसमें सरकारी पोर्टल और मिलिट्री कम्युनिकेशन सिस्टम को टारगेट किया जा रहा है। इसके अलावा, ईरान के एक पॉपुलर ऐप, BadeSaba को भी टारगेट किया गया है।
डायरेक्ट और इनडायरेक्ट अटैक दुश्मन देशों पर असर डालते हैं
साइबर अटैक दुश्मन देशों को कई तरह से टारगेट करते हैं। इसका मुख्य मकसद मिलिट्री कम्युनिकेशन सिस्टम को रोकना और लोगों को सरकार के खिलाफ करना है।
AI की अहम भूमिका
ईरान के खिलाफ युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। बैन होने के बावजूद, US मिलिट्री ने ईरान के खिलाफ एंथ्रोपिक के क्लाउड का इस्तेमाल किया है।
साइबर अटैक कहां होते हैं?
पावर ग्रिड को हैक करना और पावर सप्लाई बंद करना
मिलिट्री कम्युनिकेशन सिस्टम को बंद करना
मिलिट्री GPS सिस्टम को नष्ट करना
डेटा सेंटर को बंद करना
सरकारी वेबसाइट को टारगेट करना
फेक न्यूज़ फैलाना भी साइबर अटैक का एक रूप है।
दुश्मन देशों में फेक न्यूज़ फैलाना
डीपफेक का इस्तेमाल करके फेक वीडियो बनाना
सैटेलाइट कनेक्टिविटी को बाधित करना भी इसमें शामिल है।
ड्रोन अटैक
भविष्य में, AI ड्रोन स्वॉर्म अटैक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इस टेक्नोलॉजी के तहत, दर्जनों या सैकड़ों ड्रोन एक साथ उड़ते हैं, AI की मदद से एक नेटवर्क के माध्यम से अपने आप मिशन को अंजाम देते हैं, बिना हर ड्रोन को अलग से कंट्रोल करने की ज़रूरत के।








