नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। स्टार्टअप संस्थापकों ने स्टार्टअप इंडिया मिशन के 10 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार को छोटे शहरों और कस्बों के उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की विभिन्न पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से उद्यमियों की भूमि रहा है और सरकारी योजनाएं उन्हें समर्थन देने के लिए एक उचित ढांचा तैयार करने में मदद कर रही हैं।
राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज हम स्टार्टअप इंडिया के 10 साल पूरे होने का माइलस्टोन सेलिब्रेट कर रहे हैं। 10 साल की यह यात्रा सिर्फ एक सरकारी योजना के सफल होने की कहानी नहीं है, यह आप जैसे लाखों लोगों के सपनों की यात्रा है।”
इस मौके प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया मिशन में योगदान देने वाले युवाओं की सराहने करते हुए कहा, “हमारे यंग इनोवेटर्स, जिन्होंने नए सपने देखने का साहस दिखाया, मैं उन सभी की बहुत-बहुत सराहना करता हूं।”
मिस्टईओ के सह-संस्थापक और सीईओ सैमुअल जॉन ने कहा कि भारत हमेशा से उद्यमियों की भूमि रहा है, और ये पहलें उन्हें समर्थन देने के लिए एक उचित ढांचा तैयार करने में मदद कर रही हैं।
मिस्टईओ के सीटीओ कमांडर (सेवानिवृत्त) सुधीश टीएम ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, “प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलकर और अपनी क्षमताओं, अपने उत्पादों की क्षमता और समाज के साथ-साथ सरकारी तंत्र पर उनके संभावित प्रभाव के बारे में उन्हें समझाने के लिए मैं बहुत उत्साहित था।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं स्टार्टअप इंडिया मिशन का आभारी हूं जिसने इसे संभव बनाया। उनके साथ बातचीत अच्छी रही। प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी परियोजनाओं और उत्पादों के बारे में हमारी व्याख्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन्होंने प्रश्न भी पूछे। यह वास्तव में एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव था।”
एयरोबे की सीईओ और सह-संस्थापक नेहा चौहान के अनुसार, ‘स्टार्टअप इंडिया नेशनल स्टार्टअप अवार्ड’ प्राप्त करना किसी भी उद्यमी के लिए सपने के सच होने जैसा है।
उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, “हम इस पल का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, और मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया फंड योजना हो या निधि प्रयास योजना, विभिन्न योजनाओं के माध्यम से एक अद्भुत पहल की है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में बताया कि भारत महज दस वर्षों में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बनकर उभरा है। स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में 500 से भी कम थी, जो आज बढ़कर दो लाख से अधिक हो गई है। वहीं, यूनिकॉर्न की संख्या चार से बढ़कर लगभग 125 हो गई है। भारतीय स्टार्टअप्स लगातार आईपीओ लॉन्च कर रहे हैं, रोजगार सृजित कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
फ्यूजलेज इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक और एमडी देविका चंद्रशेखरन ने बताया कि जब हमने कंपनी शुरू की थी, तब हमारी टीम में सिर्फ दो सदस्य थे। यह स्टार्टअप कृषि क्षेत्र की गंभीर चुनौतियों का समाधान कर रहा है।
चंद्रशेखरन ने कहा,“हमारे क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद हमें स्टार्टअप का आईडिया आया,जिसने हमें किसानों के लिए समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। हमने फसल क्षति और पौध उपचार विधियों जैसी समस्याओं के समाधान के लिए दो ड्रोन बनाए हैं।”
हाइफन एससीएस के सह-संस्थापक और सीईओ अरुण पंडित के अनुसार, यह उनके लिए गर्व का क्षण है। हमने भारत और विदेश में कई पुरस्कार जीते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान प्राप्त करना बहुत भावुक करने वाला है। हमें बेहद गर्व है और हमारी टीम भारत के नवाचारों को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
–आईएएनएस
एबीएस/








