90 के दशक में बॉलीवुड के लोकप्रिय चेहरों में शुमार रहे दीपक तिजोरी न सिर्फ अपने दमदार सपोर्टिंग और नेगेटिव रोल्स के लिए जाने जाते हैं, बल्कि उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया। ‘आशिकी’ में बालू और ‘जो जीता वही सिकंदर’ में शेखर मल्होत्रा का किरदार आज भी दर्शकों के ज़ेहन में ताजा है। एक्टिंग के बाद 2003 में उन्होंने निर्देशन की ओर रुख किया और ‘Oops’ के साथ डायरेक्शन डेब्यू किया। इसके बाद ‘फरेब’, ‘टॉम, डिक और हैरी’ जैसी फिल्में आईं। हालांकि, फिल्मों से ज्यादा चर्चा में उनके व्यक्तिगत जीवन ने जगह बनाई।
शादी और परिवार
दीपक तिजोरी ने फैशन डिजाइनर शिवानी तिजोरी से शादी की थी। दोनों की एक बेटी है, समारा तिजोरी, जो अब धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री में कदम रख रही हैं। सब कुछ सामान्य लगने वाले इस परिवार की सच्चाई तब सामने आई जब साल 2017 में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि दीपक को उनकी पत्नी ने घर से बाहर निकाल दिया है।
विवाहेतर संबंध और घरेलू विवाद
रिपोर्ट्स के अनुसार, दीपक के एक एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की वजह से शिवानी ने उन्हें मुंबई के गोरेगांव स्थित घर से बाहर निकाल दिया। आरोप था कि शिवानी ने दीपक को घर में सिर्फ एक कमरा दिया था और नौकरों को उन्हें खाना देने से भी मना किया था। इसके बाद दीपक कथित तौर पर एक दोस्त के घर में रहने लगे।
शादी की वैधता पर उठे सवाल
मामला तब और पेचीदा हो गया जब दीपक तिजोरी ने शिवानी के साथ अपनी शादी को ही अवैध करार दे दिया। उन्होंने दावा किया कि शिवानी ने अपने पहले पति से तलाक नहीं लिया था, इसलिए वह उनकी कानूनी पत्नी नहीं हैं। हालांकि, इस पर दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन मामला मीडिया में गर्माया रहा।
कुनिका सदानाह का बयान
इस पूरे विवाद पर दीपक की भाभी और अभिनेत्री कुनिका सदानाह ने बयान दिया। उन्होंने मीडिया से कहा, “26 साल शादी में रहने के बाद कोई कैसे कह सकता है कि शादी वैध नहीं थी? यह कोई शरारत कर रहा है। अदालत जो सही है वही तय करेगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दीपक को घर से बाहर नहीं निकाला गया था। उनका कहना था कि दीपक अब भी घर में आते-जाते रहते हैं और अपनी गर्लफ्रेंड के साथ भी रहते हैं।
शिवानी तिजोरी का आरोप
बाद में, शिवानी तिजोरी ने भी चुप्पी तोड़ी और कहा, “दीपक तिजोरी ने एक पति, एक पिता और एक इंसान के रूप में सभी सीमाएं पार कर दी हैं। उन्होंने शालीनता, नैतिकता और संवेदनशीलता जैसे मूल्यों की अनदेखी की है।”





