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62 साल पहले ‘द बीटल्स’ के खुमार में डूबा था अमेरिका, ब्रिटिश गायकों ने संगीत जगत की मोड़ दी थी धारा

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नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। विश्व संगीत और पॉप संस्कृति के इतिहास में 9 फरवरी 1964 का दिन खास अहमियत रखता है। ये एक विंड ऑफ चेंज की तरह रहा, जो निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज है। इसी दिन ब्रिटेन का मशहूर रॉक बैंड ‘द बीटल्स’ पहली बार अमेरिकी टेलीविजन के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘द एड सुलिवन शो’ में दिखा। इस एक प्रसारण ने न केवल बैंड के करियर की दिशा बदल दी, बल्कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया में युवा संस्कृति, संगीत और फैशन पर गहरा प्रभाव डाला।

एड सुलिवन शो उस समय अमेरिका का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला साप्ताहिक टीवी शो था। जब बीटल्स इस मंच पर आए, तब अमेरिका पहले ही राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की हत्या के सदमे से उबरने का प्रयास कर रहा था। ऐसे में बीटल्स की धमाकेदार प्रस्तुति, कुछ अलग हेयरस्टाइल और ताजातरीन संगीत ने अमेरिकी दर्शकों को नई उम्मीद और उत्साह से भर दिया। इस कार्यक्रम को 7 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा, जो उस दौर में टेलीविजन इतिहास के सबसे बड़े दर्शक आंकड़ों में से एक था।

जॉन लेनन, पॉल मैककार्टनी, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार ने मंच पर “ऑल माई लविंग,” “शी लव्स यू,” और “आई वांट टू होल्ड योर हैंड” जैसे गीत प्रस्तुत किए। दर्शक दंग रह गए। स्टूडियो में मौजूद प्रशंसकों की चीख-पुकार और उत्साह ने यह साफ कर दिया कि अमेरिका में एक नया सांस्कृतिक तूफान आ चुका है, जिसे आगे चलकर “बीटलमेनिया” के नाम से जाना गया।

इस एक टीवी शो के बाद बीटल्स रातों-रात अमेरिकी युवाओं के आदर्श बन गए। उनके संगीत ने रॉक और पॉप की परिभाषा बदल दी और ब्रिटिश कलाकारों के लिए अमेरिकी बाजार के दरवाजे खोल दिए। यही कारण है कि इतिहासकार इस घटना को “ब्रिटिश इनवेजन” की शुरुआत भी मानते हैं, जब ब्रिटेन के कई बैंड अमेरिका में बेहद लोकप्रिय हुए।

9 फरवरी 1964 की यह प्रस्तुति सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह उस दौर की सामाजिक और सांस्कृतिक सोच में बदलाव का संकेत थी। द बीटल्स ने दिखा दिया कि संगीत सीमाओं, भाषाओं और देशों से ऊपर उठकर पूरी दुनिया को एक साथ जोड़ सकता है।

–आईएएनएस

केआर/

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