Home मनोरंजन मकर संक्रांति की रौनक बढ़ाते हैं बॉलीवुड के आइकॉनिक पतंगबाजी वाले गीत

मकर संक्रांति की रौनक बढ़ाते हैं बॉलीवुड के आइकॉनिक पतंगबाजी वाले गीत

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मुंबई, 13 जनवरी (आईएएनएस)। भारती सिनेमा में त्योहारों का चित्रण हमेशा से खास रहा है, और मकर संक्रांति या उत्तरायण जैसे पर्वों पर होने वाली पतंगबाजी को हिंदी सिनेमा ने खूबसूरती से पर्दे पर पेश किया है, जिसमें त्योहार की रौनक के साथ ये गाने आज भी तमाम दर्शकों के दिलों में खास जगह रखते हैं।

आपको कुछ यादगार गानों के बारे में बताते हैं, जो पतंगबाजी के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और सिनेमा के खूबसूरत मेल को भी दर्शाते हैं।

उड़ी उड़ी जाए ‘रईस’: यह गाना शाहरुख खान और माहिरा खान पर फिल्माया गया है। यह गुजरात के उत्तरायण पर्व की पूरी जीवंतता दिखाता है। पतंगबाजी, गरबा और सामूहिक उत्सव का शानदार मेल इस गाने में है। आज भी यह गीत मकर संक्रांति पर खासतौर पर सुना जाता है।

ढील दे, ढील दे दे रे भैया ‘हम दिल दे चुके सनम’: मकर संक्रांति पर आधारित यह क्लासिक गीत बॉलीवुड में पतंगबाजी का प्रतीक बन चुका है। इस गाने को सलमान खान और ऐश्वर्या राय ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से गुजराती संस्कृति, पारिवारिक माहौल और चुलबुले रोमांस को खूबसूरती से पेश किया है।

मांझा ‘काय पो चे’: पतंग की डोक मांझा के नाम पर बना यह गाना सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि दोस्ती, सपनों और जिंदगी में बदलाव की कहानी भी कहता है। गुजरात की पतंगबाजी की पृष्ठभूमि में बना यह गीत युवाओं में आज भी बहुत लोकप्रिय है।

रुत आ गई रे ‘1947 अर्थ’: एआर रहमान की आवाज में यह भावुक गाना आमिर खान और नंदिता दास पर फिल्माया गया है। पतंगबाजी के मजेदार सीन्स के साथ यह गीत खुशी और जिंदगी की गहरी सच्चाई को बहुत खूबसूरती से जोड़ता है।

अंबरसरिया ‘फुकरे’: यह गाना पूरी तरह पतंगबाजी पर तो नहीं है, लेकिन इसके पतंगों वाले दृश्य, पुलकित सम्राट की मासूमियत और रोमांटिक मस्ती इसे त्योहारों का हिस्सा बना देते हैं। यह गीत आज भी युवाओं की आजादी और मजेदार अंदाज को बखूबी दिखाता है।

–आईएएनएस

एनएस/डीकेपी

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