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भारत की अधिकतम ऊर्जा मांग वित्त वर्ष 26 में 242.49 गीगावाट पर पहुंची, डिमांड-सप्लाई में अंतर ऐतिहासिक निचले स्तर पर

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नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। भारत की अधिकतम ऊर्जा मांग वित्त वर्ष 2025-26 में 242.49 गीगावाट पर पहुंच गई है। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को दी गई।

साथ ही सरकार ने कहा कि ऊर्जा क्षमता और ट्रांसमिशन लाइनों के मजबूत विस्तार के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में ऊर्जा की कमी (डिमांड-सप्लाई) ऐतिहासिक निचले स्तर 0.03 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो कि वित्त वर्ष 2013-14 में 4.2 प्रतिशत पर थी।

ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि देश में स्थापित कुल ऊर्जा क्षमता 30 नवंबर, 2025 तक बढ़कर 509.743 गीगावाट हो गई है, जो कि 31 मार्च, 2014 में 249 गीगावाट थी। इस अवधि के दौरान देश में स्थापित ऊर्जा क्षमता में 104.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1,460 केडब्ल्यूएच हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 2013-14 की खपत 957 केडब्ल्यूएच के मुकाबले 52.6 प्रतिशत (503 केडब्ल्यूएच) ज्यादा है।

इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की औसत उपलब्धता 2014 में 12.5 घंटे से बढ़कर 22.6 घंटे हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में अब 2014 के 22.1 घंटे की तुलना में 23.4 घंटे तक बिजली की आपूर्ति होती है, जो बिजली सेवाओं की विश्वसनीयता और पहुंच में महत्वपूर्ण सुधार को दर्शाता है।

अप्रैल 2014 से अब तक, बड़े जलविद्युत संयंत्रों सहित 178 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है।

सरकार के अनुसार, इसमें 130 गीगावाट सौर ऊर्जा, 33 गीगावाट पवन ऊर्जा, 3.4 गीगावाट बायोमास, 1.35 गीगावाट लघु जलविद्युत और लगभग 9.9 गीगावाट बड़े जलविद्युत उत्पादन क्षमता शामिल है, जो स्वच्छ ऊर्जा के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की अनुमानित बिजली मांग को पूरा करने के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 (30 नवंबर, 2025 तक) में 13.32 गीगावाट की नई कोयला आधारित तापीय क्षमता आवंटित की गई है।”

–आईएएनएस

एबीएस/

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