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AI के बढ़ते धोखे! वायरल वीडियो से लेकर मिम तक, ये तरीके बताएंगे कि कंटेंट असली है या AI जनरेटेड

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2026 में, “देखना ही विश्वास करना है” वाली कहावत पुरानी हो गई है। “अलीना आमिर 4:47 नया वीडियो” या “आरोही मिम 3 मिनट 24 सेकंड वायरल वीडियो लिंक” जैसे मैसेज आजकल इंटरनेट पर तेज़ी से फैल रहे हैं, लेकिन सावधान! ये न तो असली वीडियो हैं और न ही लीक हुए फुटेज। यह साइबर अपराधियों द्वारा बिछाया गया एक मनोवैज्ञानिक जाल है, जो आपकी डिजिटल सुरक्षा से समझौता करने के लिए AI डीपफेक और मैलवेयर का इस्तेमाल करते हैं।

‘टाइमस्टैम्प ट्रैप’: 4:47 और 3:24 के पीछे का गणित
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, स्कैमर वीडियो के साथ ‘4 मिनट 47 सेकंड’ या ‘7 मिनट 11 सेकंड’ जैसे सटीक टाइमस्टैम्प का इस्तेमाल करते हैं ताकि यूज़र्स को विश्वास हो जाए कि यह मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया गया असली फुटेज है। खतरनाक लिंक की सूची: 2026 में, 4:47 (अलीना आमिर मैलवेयर), 3:24 (आरोही मिम बेटिंग ऐप ट्रैप), और 19:34 (पायल गेमिंग डीपफेक लूप) जैसे लिंक को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
सर्च इंजन मैनिपुलेशन: इन सटीक नंबरों का इस्तेमाल गूगल सर्च में ऊंची रैंक पाने के लिए भी किया जाता है। अगर टाइमस्टैम्प बहुत सटीक और असामान्य है, तो 99% संभावना है कि यह एक जाल है।

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AI डीपफेक की पहचान कैसे करें? (विज़ुअल फोरेंसिक)
भले ही 2026 में AI टेक्नोलॉजी बहुत एडवांस्ड हो गई है, फिर भी कुछ डिजिटल निशान रह जाते हैं:

पलकें न झपकना (डेड आई सिंड्रोम): AI इंसानी आंखों की प्राकृतिक हरकतों की नकल करने में संघर्ष करता है। अगर वीडियो में व्यक्ति लंबे समय तक पलकें नहीं झपकाता है या पलकें झपकने का पैटर्न रोबोट जैसा है, तो यह डीपफेक हो सकता है। लिप-सिंक और दांत: जब व्यक्ति बोलता है तो होंठों की हरकतों और ऑडियो के बीच विसंगति देखें (लिप-सिंक फेल)। अक्सर, AI-जेनरेटेड वीडियो में, दांत एक ठोस सफेद ब्लॉक की तरह दिखते हैं, जिनमें अलग-अलग दांतों की स्पष्ट संरचना नहीं होती है।

फ्लिकर इफ़ेक्ट: अगर व्यक्ति अपना हाथ चेहरे के सामने लाता है या अपना सिर तेज़ी से घुमाता है, तो चेहरे के किनारों के आसपास हल्का डिजिटल “फ्लिकर” या धुंधलापन दिखाई देगा।

रोशनी में विसंगतियां: क्या चेहरे पर रोशनी कमरे की बैकग्राउंड लाइटिंग से मेल खाती है? डीपफेक में, चेहरा अक्सर बैकग्राउंड की तुलना में ज़्यादा चमकदार या चिकना दिखता है।

वीडियो देखना ही एकमात्र खतरा नहीं है; लिंक पर क्लिक करना भी रिस्की है:

फ़ाइल एक्सटेंशन चेक करें: अगर आप कोई वीडियो डाउनलोड कर रहे हैं और फ़ाइल का नाम .apk (एंड्रॉइड ऐप) या .exe (विंडोज प्रोग्राम) पर खत्म होता है, तो तुरंत डाउनलोड कैंसिल कर दें। असली वीडियो हमेशा .mp4, .mov, या .avi फॉर्मेट में होते हैं।

रीडायरेक्ट टेस्ट: अगर प्ले बटन पर क्लिक करने पर कोई नया टैब खुलता है या आपको “वीडियो प्लेयर” इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है, तो यह शायद मैलवेयर है।

URL चेक करें: स्कैमर अब सरकारी (.gov) या यूनिवर्सिटी (.edu) वेबसाइट्स को हैक करके उन पर ये नकली पेज होस्ट कर रहे हैं। सिर्फ़ डोमेन नाम पर भरोसा न करें; कंटेंट की सच्चाई वेरिफाई करें।

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