नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। भारत ने 2024 को आधार वर्ष मानकर नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सीरीज शुरू की है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि यह नई सीरीज लोगों के खर्च करने के तरीके को बेहतर ढंग से दिखाती है और इससे गरीबी का अनुमान ज्यादा सही तरीके से लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि नए आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि लोगों की आय और काम करने की क्षमता (उत्पादकता) में बढ़ोतरी हुई है।
नई सीरीज के अनुसार, अब लोग खाने-पीने की चीजों पर कम और सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और इंटरनेट जैसी सुविधाओं पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। नागेश्वरन ने कहा कि सही आंकड़े मिलने से सरकार और रिजर्व बैंक को बदलती आर्थिक स्थिति के अनुसार सही फैसले लेने में मदद मिलेगी।
जनवरी में देश की महंगाई दर 2.75 प्रतिशत रही, जो ग्रामीण क्षेत्रों में 2.73 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 2.77 प्रतिशत रही। पुरानी सीरीज में दिसंबर 2025 तक खाद्य महंगाई नकारात्मक थी, लेकिन नई सीरीज में यह 2.1 प्रतिशत दर्ज की गई है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा कि अब ब्याज दर जैसे फैसले लेते समय सरकार मांग और आपूर्ति की स्थिति को बेहतर समझ सकेगी। उन्होंने बताया कि नई सीरीज में खाने-पीने की चीजों का हिस्सा कम कर दिया गया है, जिससे महंगाई के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है।
अगर महंगाई में उतार-चढ़ाव कम होगा, तो महंगाई भत्ता (डीए) और अन्य सरकारी खर्च, जो सीपीआई से जुड़े होते हैं, वे भी ज्यादा स्थिर और अनुमानित रहेंगे। इससे सरकार के बजट की योजना बनाना आसान होगा।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने गुरुवार को 2024 आधार वर्ष वाली नई सीपीआई सीरीज जारी की। पहले इसमें छह समूह थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 12 भागों में बांटा गया है ताकि यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो सके। इसमें ‘एचसीईएस 2023-24’ सर्वे के आधार पर लोगों की खर्च की टोकरी को अपडेट किया गया है।
नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है, जिनमें 308 वस्तुएं और 50 सेवाएं शामिल हैं। इससे यह साफ होता है कि लोगों के खर्च में सेवाओं की भूमिका बढ़ रही है।
मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि सरकार अब हर पांच साल में सीपीआई का आधार वर्ष बदलने की योजना बना रही है। अगला उपभोक्ता खर्च सर्वे 2027-28 में किया जाएगा।
–आईएएनएस
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