नई दिल्ली, 24 फरवरी (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रो. इंदर सिंह ठाकुर ने मंगलवार को कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में जाकर विरोध करना एक गलत फैसला था।
समाचार एसेंजी आईएएनएस से बातचीत करते हुए ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना अधिकार है, लेकिन उसकी एक जगह और स्थान होता है। एक ऐसी समिट जिसमें देश-दुनिया के सीईओ, राजनीतिज्ञ और कई बड़े लोग आए हो, वहां जाकर कुछ युवाओं द्वारा शर्टलेस होकर विरोध करना बिल्कुल गलत था।
उन्होंने कहा कि विरोध करने के लिए जंतर-मंतर बना हुआ है। आप वहां जा सकते थे।
वहीं, नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत ने आईएएनएस से कहा कि यह विश्व का एक बड़ा एआई समिट था, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और तकनीकी क्षेत्र के दिग्गज शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भारत के एआई योगदान को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया गया है और यह समिट भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण और सफल पहल रही।
प्रो. रावत ने उदाहरण देते हुए कहा कि दवा खोज (ड्रग डिस्कवरी) जैसे क्षेत्र में जहां पहले 15 से 18 साल लगते थे, वहीं एआई की मदद से यह प्रक्रिया 5 से 6 साल में पूरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि एआई का प्रभाव हर क्षेत्र में देखने को मिलेगा और इससे रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, हाईवे निर्माण और डिजिटल लेन-देन जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने से एआई विकास को नई गति मिलेगी।
इसके साथ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक बिनय कुमार सिंह ने समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह देश की तरक्की का मंच था; इसे राजनीतिक मंच नहीं बनने देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित होती है।
साथ ही उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए थी और इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था। उन्हें अपनी पार्टी के भीतर ऐसी घटनाओं, विशेषकर इस तरह के अभद्र और अनुचित प्रदर्शनों पर ध्यान देना चाहिए था, न कि इसका समर्थन करना चाहिए था।
–आईएएनएस
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