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संगीत मेरी जिंदगी का स्वाभाविक हिस्सा, कभी नकल नहीं की; एआर रहमान एक प्रेरणास्रोत : हरिहरन (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

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मुंबई, 1 मार्च (आईएएनएस)। अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज के माध्यम से उन्होंने गजल, पार्श्व संगीत और फ्यूजन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। पांच दशकों के लंबे करियर में उन्होंने अपनी मौलिकता के साथ कभी समझौता नहीं किया। समाचार एजेंसी ‘आईएएनएस’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में हरिहरन ने अपनी 50 वर्षों की संगीत यात्रा, दिग्गज संगीतकार ए.आर. रहमान के साथ अपने प्रगाढ़ संबंधों और 10 से अधिक भाषाओं में गायन के अनुभवों को साझा किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संगीत उनके लिए मात्र एक पेशा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। हरिहरन ने अपने बचपन और परिवार के बारे में कहा, “मेरा जन्म ऐसे परिवार में हुआ जहां राग की खुशबू हमेशा महकती रहती थी। बचपन से ही संगीत मेरे लिए कोई करियर नहीं था, बल्कि यह जीवन का स्वाभाविक हिस्सा था। फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत मुश्किल थी क्योंकि मैं अपनी ओरिजिनल आवाज और स्टाइल पर अडिग था। मैंने कभी किसी की नकल नहीं की और अपनी आवाज को बनाए रखा।”

एआर रहमान के साथ काम करने के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, “रहमान के साथ काम करना दो दोस्तों का एक ही सीढ़ी पर बैठकर विजन शेयर करने जैसा है। वह गायक को एक स्टेपिंग स्टोन देते हैं। उनके साथ काम करते समय आपको स्पंज की तरह होना पड़ता है – उनके नए विचारों को सोखना और उनमें अपनी रूहदारी भरनी पड़ती है। यह अनुभव हमेशा प्रेरणादायक रहा है।”

गजल की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए हरिहरन ने कहा,” गजल खास और आत्मा को छूने वाली होती है। आज के इंस्टेंट दौर में, जहां लोग स्विगी ऑर्डर की तरह सब कुछ तुरंत चाहते हैं, गजल को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उसे समकालीन बनाना जरूरी है। इसी थीम पर मैंने अपना नया एल्बम ‘जान मेरी’ लॉन्च किया है, जिसमें पारंपरिक गजल को आधुनिक बोसा नोवा रिदम के साथ जोड़ा गया है। इसे ‘गजल-नोवा’ का नाम दिया है।”

फ्यूजन म्यूजिक के भविष्य पर भी उन्होंने बात की और बताया, ” ‘कॉलोनियल कजिन्स’ का दौर सिर्फ म्यूजिक नहीं, एक एनर्जी रही जिसने सीमाओं को तोड़ दिया। लेस्ली (ल्यूइस) और मैं आज भी संपर्क में हैं और संगीत पर चर्चा करते रहते हैं। फ्यूजन का भविष्य तभी है जब उसमें कल्पना और ईमानदारी बनी रहे।”

हरिहरन 10 से ज्यादा भाषाओं में गाने गा चुके हैं इस अनोखे अनुभव को लेकर उन्होंने बताया, “हर भाषा की अपनी ऊर्जा होती है। मैं हर भाषा को स्पंज की तरह सोखने की कोशिश करता हूं। भाव कैप्चर करने का तरीका यही है कि शब्दों के पीछे छिपे ख्याल को समझें। 50 साल का यह सफर मेरे लिए यादों का टाइम कैप्सूल जैसा है। सबसे खूबसूरत बात यह है कि मैं कभी सफलता का बोझ लेकर नहीं चलता। आज भी रिकॉर्डिंग के दौरान उसी हिडन चाइल्ड वाली जिज्ञासा के साथ काम करता हूं जो पहले दिन महसूस होती थी।”

–आईएएनएस

एमटी/एएस

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