Home मनोरंजन संतोष आनंद: दिल के जज्बातों से निकला ‘एक प्यार का नगमा है’...

संतोष आनंद: दिल के जज्बातों से निकला ‘एक प्यार का नगमा है’ गाना, जो बन गया ‘सॉन्ग ऑफ मिलेनियम’

2
0

मुंबई, 4 मार्च (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे होते हैं, जो लोगों की जुबां पर हमेशा के लिए बने रहते हैं। ऐसा ही एक गाना है ‘एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है…’; यह गीत जब भी प्ले होता है तो हर उम्र का व्यक्ति इसके शब्दों को महसूस करने लगता है। इस गाने को मशहूर गीतकार संतोष आनंद ने फिल्म ‘शोर’ के लिए लिखा था। बाद में इस गाने को ‘सॉन्ग ऑफ मिलेनियम’ का टैग दिया गया, लेकिन इस यादगार गीत के पीछे एक निजी और भावुक कहानी छिपी है। दरअसल, यह गाना संतोष आनंद ने अपनी प्रेमिका के लिए लिखा था।

साल 1972 में जब ‘शोर’ रिलीज हुई, तब किसी ने नहीं सोचा था कि उसका एक गाना इतिहास बना देगा। फिल्म में अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार थे, लेकिन फिल्म से ज्यादा चर्चा उनके इस गाने की हुई। ‘जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है…’ जैसे गाने के शब्दों ने सीधे लोगों के दिल को छू लिया। इस गाने में जिंदगी को बेहतरीन तरीके से समझाया गया। यही वजह है कि यह गाना आज भी उतना ही फ्रेश लगता है, जितना उस दौर में था।

कई साल बाद, एक कवि सम्मेलन में संतोष आनंद ने इस गाने को लेकर खास बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि यह गाना उन्होंने किसी फिल्म की कहानी को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अपने दिल की भावनाओं को महसूस करते हुए लिखा था। यह गाना उन्होंने अपनी प्रेमिका के लिए लिखा था। गाने के शब्दों को प्यार से रचा गया था।

जब संतोष आनंद ने यह खुलासा किया तो श्रोता हैरान रह गए। ‘कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना है’ जैसी लाइनों ने इस गाने को खास बना दिया।

इस गाने में गायक मुकेश और लता मंगेशकर ने आवाज दी थी। दोनों की आवाज ने इस गीत को और भी गहराई दी। संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इसकी धुन ऐसी बनाई कि शब्द और संगीत एक-दूसरे में घुल गए।

‘एक प्यार का नगमा है’ की खासियत यह है कि यह किसी एक दौर का गाना नहीं है, यह हर दौर में नया लगता है।

–आईएएनएस

पीके/डीकेपी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here