Home खेल ‘जितना हो सके शांत रहना चाहता था’, डेब्यू मुकाबले में यादगार प्रदर्शन...

‘जितना हो सके शांत रहना चाहता था’, डेब्यू मुकाबले में यादगार प्रदर्शन पर बोले प्रफुल्ल हिंगे

3
0

नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाज प्रफुल्ल हिंगे का आईपीएल डेब्यू यादगार रहा। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ हिंगे मैच के पहले ओवर में 3 विकेट लेने वाले आईपीएल इतिहास के पहले गेंदबाज बने। हिंगे ने कहा कि वह मैदान पर शांत रहकर सिर्फ अपनी गेंदबाजी और प्लान पर ध्यान देने का प्रयास करते हैं।

नागपुर के इस युवा तेज गेंदबाज ने ‘जियोस्टार प्रेस रूम’ में ‘आईएएनएस’ संग बात करते हुए बताया कि डेब्यू मुकाबले में उनका पूरा ध्यान गेंदबाजी योजना पर था। उन्होंने कहा, “ऐसा कुछ नहीं था। मैंने पहले भीड़ को अपने दिमाग से निकालने के बारे में सोचा था, और मैं जितना हो सके शांत रहना चाहता था। जब मैं प्रैक्टिस सेशन में गेंदबाजी कर रहा था, तो मैंने दबाव में गेंदबाजी की थी। इसी कारण मुझे मैच में वे सभी चीजें करनी थीं और जब मैंने ऐसा किया तो मुझे बहुत अच्छा लगा।”

वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल, लुआन-ड्रे प्रीटोरियस और रियान पराग को आउट करते हुए हिंज ने कहा कि उन्हें एहसास नहीं हुआ कि वह इतिहास रच रहे हैं। “मैं बस गेंदबाजी करने पर ध्यान दे रहा था। विकेट लेना या न लेना मेरे हाथ में नहीं है। मुझे बस अच्छी गेंदबाजी करनी थी। मैं बस अच्छी गेंदबाजी करने और अपनी टीम को जिताने में मदद करने पर ध्यान देने का प्रयास कर रहा था। क्रिकेट का खेल ऐसा है कि अगर आप अच्छी गेंदबाजी करते हैं, तो आपको विकेट मिलेंगे।”

अपने क्रिकेट सफर को याद करते हुए हिंगे ने कहा, “मैंने 13 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। हालांकि, मुझे नहीं पता था कि लेदर बॉल क्रिकेट क्या होता है। मैं टेनिस बॉल क्रिकेट खेलता था। धीरे-धीरे मैंने अपने पापा से कहा कि मैं एक क्लब शुरू करना चाहता हूं। मैंने कहा कि मैं 12 साल की उम्र में खेलूंगा, लेकिन उन्होंने कहा कि मैं बहुत छोटा हूं और वह मुझे अगले साल वहां ले जाएंगे। तो, जब मैं 13 साल का हुआ, तो वह मुझे क्लब ले गए। मैं एक समर कैंप में हिस्सा लेना चाहता था, क्योंकि मैं देखना चाहता था कि लेदर बॉल क्रिकेट खेलने के बाद क्या होता है।”

उन्होंने आगे बताया, “जब मैं खेल रहा था, तो मेरे पापा ने कहा कि दो महीने का कैंप खत्म हो गया है। मैंने कहा कि मैं खेलना जारी रखना चाहता हूं। मेरे पापा ने सोचा कि मैं खेलता रहूंगा और अगर खेलता रहा, तो थक जाऊंगा, घर आऊंगा और सो जाऊंगा। हालांकि, मैं ज़िद्दी था और मुझे पता था कि मैं भारत के लिए खेलना चाहता हूं। मुझे नहीं पता था कि घरेलू क्रिकेट क्या होता है या क्लब मैच क्या होते हैं। मुझे बस इतना पता था कि मैं भारत के लिए और उस नीली जर्सी के लिए खेलना चाहता हूं। जाहिर है कि हर कोई यही चाहता है। मुझे धीरे-धीरे प्रोसेस के बारे में पता चला और मैंने उसके हिसाब से कड़ी मेहनत की। फिर 2016 में मैंने अंडर-16, अंडर-19 और वीसीए के लिए खेला। मैंने अलग-अलग एज ग्रुप में उनका प्रतिनिधित्व किया।”

उन्होंने बताया, “फिर पिछले साल मुझे पुडुचेरी के खिलाफ अपना डेब्यू मैच खेलने का मौका मिला और मैंने 4 विकेट लिए। इस साल (2026) में मुझे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में अपना डेब्यू करने का मौका मिला और मैंने लगभग चार ओवर डालते हुए 23 रन देकर एक विकेट निकाला। इसी वजह से मैं खुश हूं, मैं अच्छा कर रहा हूं, यह सब कड़ी मेहनत का नतीजा है और मैं बस वही कर रहा हूं।”

हिंज ने बताया कि चेन्नई स्थित एमआरएफ पेस फाउंडेशन में ट्रेनिंग और ऑस्ट्रेलिया दौरे ने उनकी गेंदबाजी को काफी निखारा। वहां उन्हें दुनिया के अलग-अलग तेज गेंदबाजों के साथ सीखने का मौका मिला, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके अलावा सनराइजर्स हैदराबाद के गेंदबाजी कोच वरुण एरोन और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्राथ ने भी उनकी तकनीक और फिटनेस को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई।

–आईएएनएस

एसएम/डीकेपी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here