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शनिदेव को क्यों तेल चढ़ाया जाता है? क्या है इसके फायदे जाने सब कुछ विस्तार से

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भारतीय सनातन परंपरा में शनिदेव को न्याय का देवता माना गया है। वे कर्मों के अनुसार फल देने वाले एकमात्र देव हैं और उन्हें लेकर आम जनमानस में भय और श्रद्धा दोनों का भाव देखने को मिलता है। विशेषत: शनिवार के दिन शनि महाराज को तेल चढ़ाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है? और इससे क्या लाभ होते हैं? आइए जानते हैं इससे जुड़ी मान्यताएं और वैज्ञानिक पहलू भी।

शनिदेव का स्वरूप और उनका प्रभाव

शनि देव सूर्य पुत्र हैं और नवग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। इन्हें न्यायप्रिय और कठोर दंडाधिकारी कहा गया है। मान्यता है कि यदि किसी की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।

शनिदेव का रंग काला और वाहन काला कौआ माना जाता है। वे लोहे, काले तिल, काली वस्तुएं और सरसों के तेल से विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं।

तेल क्यों चढ़ाया जाता है शनिदेव को?

  1. शरीर को ठंडक देने के लिए:
    पौराणिक मान्यता के अनुसार शनिदेव की दृष्टि बहुत तीव्र और त्वरित असर डालने वाली होती है। जब भक्त शनिदेव को तेल चढ़ाते हैं, तो उनकी ‘तीक्ष्ण दृष्टि’ शांत होती है और वे प्रसन्न होते हैं।

  2. शनि के कष्टों को कम करने के लिए:
    तेल चढ़ाने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। विशेष रूप से शनिदोष, साढ़ेसाती या ढैय्या के समय तेल चढ़ाने से जीवन में बाधाएं कम होती हैं।

  3. दर्शन से पहले प्रतिबिंब देखना:
    एक अन्य मान्यता यह है कि शनिदेव को तेल चढ़ाने से पहले व्यक्ति उस तेल में अपनी छवि देखता है, जो आत्मनिरीक्षण का प्रतीक होता है। इससे व्यक्ति को अपने कर्मों का आभास होता है और वह सुधार की ओर अग्रसर होता है।

  4. पौराणिक कथा का प्रभाव:
    एक कथा के अनुसार हनुमान जी ने शनिदेव को लंका में रावण के कारावास से मुक्त किया था और उन्हें शरीर पर तेल लगाया था, जिससे उन्हें राहत मिली। तभी से शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

शनिदेव को तेल चढ़ाने के लाभ

  • शनि की दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव कम होते हैं

  • मानसिक तनाव और भय दूर होता है

  • धन संबंधी रुकावटें कम होती हैं

  • रोग, विशेषकर हड्डी व जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है

  • नौकरी, व्यापार और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है

शनिवार को कैसे करें तेल चढ़ाने की विधि?

  1. सुबह स्नान करके नीले या काले वस्त्र धारण करें

  2. शनि मंदिर जाएं या पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं

  3. शनिदेव की मूर्ति या चरणों में सरसों का तेल चढ़ाएं

  4. “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें

  5. जरूरतमंदों को काले तिल, उड़द और तेल का दान करें

निष्कर्ष

शनिदेव को तेल चढ़ाना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक आस्था और आत्मशुद्धि का माध्यम है। यह न केवल आपके ग्रहों को शांत करता है, बल्कि आपके विचारों और कर्मों को भी सुधारने का संकेत देता है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक शनिदेव की आराधना की जाए, तो वे सबसे कठोर नहीं बल्कि सबसे न्यायप्रिय देवता सिद्ध होते हैं।

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