भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से उभरती हुई शक्ति बनकर सामने आ रही है। मंगलवार को भारत सरकार और वित्तीय जगत के लिए एक सकारात्मक खबर आई जब वैश्विक वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी UBS (यूबीएस) ने भारत के वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की वास्तविक GDP ग्रोथ दर (Real GDP Growth Rate) के अनुमान को संशोधित कर बढ़ा दिया। पहले यह अनुमान 6% था, जिसे अब 6.4% कर दिया गया है।
UBS का यह अपग्रेड चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन और घरेलू मांग, निवेश तथा स्थिर कृषि उत्पादन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह आंकड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के लिए चुनावी साल में बड़ी राहत और उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
चौथी तिमाही में शानदार प्रदर्शन
कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने जनवरी से मार्च 2025 (Q4 FY25) की जीडीपी ग्रोथ रिपोर्ट जारी की थी, जो बेहद उत्साहजनक रही। अनुमान लगाया जा रहा था कि चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ 6.85% रहेगी, लेकिन वास्तविक आंकड़ा 7.4% निकला, जो तीसरी तिमाही (6.2%) से अधिक है। इस मजबूती का मुख्य कारण घरेलू खपत में वृद्धि, निजी निवेश में तेजी, और कृषि उत्पादन का अच्छा प्रदर्शन बताया गया है। UBS का मानना है कि यह ट्रेंड FY26 में भी जारी रहेगा और भारत की अर्थव्यवस्था लचीलेपन के साथ आगे बढ़ेगी।
डिमांड में बढ़ोतरी और व्यापारिक तनाव में राहत
UBS के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था अप्रैल में भी मजबूत बनी रही। इसके इंडिया कॉम्पोजिट इकोनॉमिक इंडिकेटर (CEI) ने अप्रैल में मासिक आधार पर 1.1% की वृद्धि दर्ज की। UBS का यह भी मानना है कि भारत में मांग बढ़ रही है, व्यापारिक तनाव कम हुआ है, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इन कारकों ने मिलकर देश की आर्थिक गति को बनाए रखा है। UBS ने कहा कि यह आर्थिक स्थिरता दर्शाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था आंतरिक रूप से सशक्त हो रही है, जो बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है।
GDP ग्रोथ अनुमान में संशोधन के पीछे की वजहें
UBS सिक्योरिटीज इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने GDP ग्रोथ रेट में किए गए संशोधन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फैसला कई प्रमुख कारणों के आधार पर लिया गया है:
-
घरेलू मांग में निरंतर मजबूती
-
वैश्विक व्यापार तनाव में संभावित कमी
-
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन
-
अच्छे मानसून की उम्मीद
-
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता
इन कारकों से ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च बढ़ेगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में भी डिमांड में उछाल आएगा। इसके अतिरिक्त, यदि सरकार टैक्स में छूट या महंगाई को नियंत्रित करने के उपाय करती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव जीडीपी पर पड़ेगा।
FY26 में कच्चे तेल की कीमतें और सरकारी नीति की भूमिका
UBS ने FY26 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए राहतभरी खबर है। इससे आयात लागत घटेगी और चालू खाता घाटा नियंत्रण में रहेगा।
रेपो रेट में कटौती की उम्मीद
मॉनिटरी पॉलिसी के मोर्चे पर UBS को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आगामी महीनों में रेपो रेट में 50 से 75 बेसिस पॉइंट की कटौती कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो रेपो रेट 5.5% तक आ सकता है, जिससे कर्ज लेना सस्ता होगा और निवेश व खपत को बढ़ावा मिलेगा।
गौरतलब है कि RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक 4 जून को होगी और 6 जून को ब्याज दरों को लेकर फैसला लिया जाएगा।
निष्कर्ष: भारत की आर्थिक तस्वीर उज्ज्वल
UBS की ताजा रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था की सकारात्मक दिशा की पुष्टि करती है। यह संकेत देती है कि भारत न सिर्फ आंतरिक मजबूती से आगे बढ़ रहा है बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी स्थिरता और विकास का उदाहरण बन रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक नीतियां अगर इसी दिशा में आगे बढ़ती रहीं, तो निकट भविष्य में भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर एक बड़ा कदम और बढ़ा सकता है।








