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एशियाई बाजारों में चौतरफा तेजी, मोटी कमाई का मौका, इन शेयरों पर रखें नजर

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एशियाई शेयर बाजारों में मंगलवार को व्यापक तेजी देखी गई, जिसका श्रेय अमेरिका और चीन के बीच फिर से शुरू हुई ट्रेड वार्ता को दिया जा रहा है। निवेशकों ने सकारात्मक संकेतों को हाथों-हाथ लिया, जिससे कई प्रमुख इंडेक्स में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया। यह तेजी इस ओर संकेत करती है कि बाजार ट्रेड टेंशन में कमी की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार को राहत मिल सकती है। बीते कुछ हफ्तों से अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते आर्थिक तनाव, विशेष रूप से तकनीकी और आयात-निर्यात मामलों को लेकर, वैश्विक बाजारों पर दबाव बना हुआ था। लेकिन अब जब दोनों देशों ने वार्ता की मेज पर लौटने का फैसला लिया है, निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है और उन्होंने शेयर बाजारों में खरीदारी को प्राथमिकता दी है।

सभी प्रमुख एशियाई इंडेक्स में तेजी, टेक और मैन्युफैक्चरिंग शेयरों में उछाल

हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स (Hang Seng) लगभग 2.3% की उछाल के साथ बंद हुआ, जो टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में भारी खरीदारी का परिणाम है। वहीं, जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) इंडेक्स भी 1.8% चढ़ा। इसके अलावा चीन के शंघाई कंपोजिट (Shanghai Composite) में भी करीब 1.2% की मजबूती देखने को मिली। विशेष रूप से चीन की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और टेक्नोलॉजी फर्मों के शेयरों में उछाल आया है, क्योंकि ट्रेड वार्ता से उम्मीद है कि अमेरिका तकनीकी कंपनियों पर लगे कुछ प्रतिबंधों को कम कर सकता है। साथ ही, यह संकेत भी मिले हैं कि अमेरिका चीन से आयात पर प्रस्तावित नए टैरिफ को टालने या घटाने पर विचार कर सकता है। दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में भी बढ़त देखी गई। KOSPI इंडेक्स करीब 1.5% बढ़ा, जबकि ASX 200 में 1.1% की तेजी रही।

ट्रेड डील की उम्मीदों से ग्लोबल सेंटीमेंट मजबूत, पर अनिश्चितता बरकरार

यह तेजी भले ही सकारात्मक हो, लेकिन बाजार विश्लेषक चेतावनी दे रहे हैं कि ट्रेड डील पूरी तरह से फाइनल नहीं हुई है और हालात अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। वार्ता में फिलहाल टैरिफ्स, तकनीकी ट्रांसफर और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा चल रही है, और इन पर सहमति बनना आसान नहीं है। JP Morgan Asset Management की चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट ने कहा, “बाजार की मौजूदा तेजी वार्ता की शुरुआत को लेकर है, लेकिन जब तक ठोस परिणाम सामने नहीं आते, तब तक ये तेजी अस्थाई हो सकती है।” हालांकि, ग्लोबल इन्वेस्टर्स का सेंटीमेंट फिलहाल सकारात्मक है, खासतौर पर क्योंकि अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में कटौती की संभावना और चीन की ओर से संभावित प्रोत्साहन उपायों (stimulus measures) की उम्मीद भी बाजार को सहारा दे रही है।

क्या भारत पर पड़ेगा असर?

भारतीय शेयर बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है। अगर अमेरिका-चीन तनाव घटता है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बेहतर होगी, जिससे भारतीय निर्यातकों और टेक कंपनियों को फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) फिर से उभरते बाजारों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे भारतीय बाजारों में निवेश बढ़ने की संभावना है। हालांकि, अगले कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होंगे जब वार्ता में ठोस प्रगति या बाधाएं सामने आएंगी। तब तक, बाजार सतर्क आशावाद के साथ आगे बढ़ सकता है।

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