8वें पे कमीशन (8th Pay Commission) ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स में हलचल मचा दी है। जब से सरकार ने टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस (ToR) जारी किया है, कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर एक्टिव हो गए हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज़्यादा चर्चा का मुद्दा एक खास मेडिकल अलाउंस है, जिसे कई बार बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है।
मेडिकल अलाउंस में 20 गुना बढ़ोतरी का बड़ा प्रस्ताव
कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को ₹1,000 प्रति महीने से बढ़ाकर ₹20,000 किया जाए। यह मांग उन कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए है जो उन इलाकों में रहते हैं जहां सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) उपलब्ध नहीं है। संगठनों का कहना है कि आज की महंगाई में ₹1,000 बहुत कम है, जिससे ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए मेडिकल इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो जाता है।
फिटमेंट फैक्टर और सालाना इंक्रीमेंट पर ज़ोर
कर्मचारी यूनियन न सिर्फ़ मेडिकल सुविधाओं के लिए बल्कि सैलरी बढ़ाने के नए फ़ॉर्मूले के लिए भी ज़ोर दे रही हैं। 3.25 के फिटमेंट फैक्टर की पुरानी मांग को फिर से दोहराया गया है। इसके अलावा, सालाना सैलरी इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 7% करने का प्रस्ताव रखा गया है। पोस्टल यूनियनों का सुझाव है कि यह कम से कम 5% होना चाहिए, क्योंकि लंबे करियर के बाद 3% की बढ़ोतरी घर चलाने के लिए काफ़ी नहीं है।
कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 66% तक बढ़ सकती है
एक मुख्य मांग फ़ैमिली यूनिट से जुड़ी है, जिसे 3 से बढ़ाकर 5 सदस्य करने का प्रस्ताव है। इसका मतलब है कि डिपेंडेंट माता-पिता को भी फ़ैमिली का हिस्सा माना जाना चाहिए। यूनियनों का दावा है कि अगर सरकार इसे मान लेती है, तो इसका बेसिक सैलरी कैलकुलेशन पर 66% तक का बड़ा असर पड़ेगा। इससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी काफ़ी बढ़ सकती है।
छुट्टी और रिटायरमेंट बेनिफिट्स के बदले कैश देने पर विचार किया जा रहा है
कर्मचारियों ने मांग की है कि LTC कैश में दी जाए ताकि कर्मचारी इसे अपनी सुविधा के अनुसार खर्च कर सकें। लीव इनकैशमेंट लिमिट को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। बुढ़ापे को ज़्यादा सुरक्षित बनाने के लिए पेंशन और दूसरे रिटायरमेंट बेनिफिट्स को बेहतर बनाने की भी कोशिश की जा रही है।
ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की मांग ज़ोर पकड़ रही है
पेंशन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। ड्राफ्टिंग कमेटी की मीटिंग में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को पूरी तरह से बहाल करने की मांग ज़ोरदार तरीके से उठाई गई। यूनियनें साफ़ तौर पर कह रही हैं कि NPS और UPS जैसी नई स्कीम को खत्म करके ओल्ड पेंशन स्कीम लागू की जानी चाहिए। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक कोई खास संकेत नहीं मिला है, लेकिन कर्मचारी संगठन अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
पे कमीशन का काम तेज़, जल्द मिल सकती है अच्छी खबर
8वें पे कमीशन ने दिल्ली में जनपथ पर चंद्रलोक बिल्डिंग में अपना ऑफिस खोल दिया है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इसकी चेयरपर्सन हैं। ऑफिस का खुलना कमीशन के काम की बढ़ती रफ़्तार को दिखाता है। आने वाले महीनों में पता चलेगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर किस हद तक सहमत होती है। अगर मेडिकल अलाउंस और सैलरी बढ़ाने जैसे प्रस्ताव मान लिए जाते हैं, तो लगभग 10 मिलियन कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलेगी।








