भारत में जीएसटी 2.0 के तहत आज से एक नई कर प्रणाली लागू हो गई है। 3 सितंबर को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में 5% और 18% की दो नई दरें पेश की गईं। इसके साथ ही, 12% और 28% की पुरानी दरों को समाप्त कर दिया गया है, जबकि 40% की एक नई तीसरी दर लक्जरी वस्तुओं पर लगाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, कई रोजमर्रा की चीजों को टैक्स से मुक्त कर दिया गया है।
यह बदलाव आज से पूरे देश में प्रभावी हो जाएगा, जिसका सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर पर देखने को मिलेगा। एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, डिशवॉशर और बड़ी स्क्रीन वाले टीवी जैसे उत्पादों पर पहले 28% का टैक्स लगता था, जो अब घटकर 18% हो गया है। इस महत्वपूर्ण कटौती से ये सभी घरेलू उपकरण सस्ते हो जाएंगे, जिससे देश के मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए उन्हें खरीदना अधिक सुलभ हो जाएगा। इस कदम का उद्देश्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और आम जनता को लाभ पहुंचाना है। यह नई कर संरचना, सरलीकरण और सामर्थ्य पर जोर देती है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि यह उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देगी और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी।
जीएसटी का नया स्लैब

- 5% – रोजमर्रा की वस्तुएं
- 18% – घर का सामान और इलेक्ट्रॉनिक जैसे स्टैंडर्ड्स गुड्स
- 40% – लक्जरी वस्तुएं
जीएसटी क्या है?

जीएसटी का मतलब वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Services Tax) है। यह भारत में लागू एक अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाता है। जीएसटी ने कई पुराने अप्रत्यक्ष करों, जैसे कि उत्पाद शुल्क, वैट (VAT) और सेवा कर, को समाप्त करके उनकी जगह ले ली है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में “एक राष्ट्र, एक कर” (One Nation, One Tax) की अवधारणा को लागू करके पूरे देश में एक एकीकृत बाजार का निर्माण करना है। जीएसटी एक बहु-स्तरीय कर है, जिसका मतलब है कि यह उत्पादन से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक, हर चरण में मूल्य वृद्धि पर लगाया जाता है। इससे कर प्रणाली सरल और अधिक पारदर्शी बनती है, और व्यवसायों तथा उपभोक्ताओं दोनों के लिए सुविधा होती है।
संशोधित जीएसटी दरें कब से लागू होंगी?
जीएसटी परिषद् की सिफारिश के अनुसार, नई जीएसटी दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होंगी।
संशोधित जीएसटी दरों के लागू होने के बाद आज से कई चीजें सस्ती हो गई हैं।
- पैकेटबंद खाद्य पदार्थ जैसे आटा, चावल, दालें, बिस्कुट, नमकीन
- साबुन, तेल, टूथपेस्ट, शैंपू
- मक्खन, घी, पनीर, दही
- कॉफी, जैम, केचप, सूखे मेवे, आइसक्रीम
इलेक्ट्रॉनिक और घरेलू उपकरण (अब 18% GST)

- एयर कंडीशनर (AC)
- रेफ्रिजरेटर (फ्रिज)
- वॉशिंग मशीन
- डिशवॉशर
- बड़ी स्क्रीन वाले टीवी, मॉनिटर, और प्रोजेक्टर
अन्य वस्तुएं
- कई दवाएं और मेडिकल उपकरण
- साइकिल
- सीमेंट (28% से 18%)
- कम्यूटर कारें (छोटी गाड़ियां), तिपहिया वाहन, एंबुलेंस
- होटल के कमरे (7,500 रुपये तक के टैरिफ वाले कमरों पर अब 5% GST)
पान मसाला से लेकर कोल्ड ड्रिंक तक

नई जीएसटी प्रणाली के लागू होने के साथ ही, कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर टैक्स की दरें बढ़ा दी गई हैं। इन वस्तुओं को 40% के नए उच्च टैक्स स्लैब में रखा गया है। इन उत्पादों में मुख्य रूप से लग्जरी और “सिन गुड्स” (हानिकारक वस्तुएं) शामिल हैं।
यहां उन प्रमुख वस्तुओं की सूची दी गई है जो आज से महंगी हो गई हैं:
पेय पदार्थ: सभी प्रकार के कोल्ड ड्रिंक्स, कार्बोनेटेड पेय, कैफीनयुक्त पेय, और फ्लेवर्ड ड्रिंक्स।
तंबाकू उत्पाद: सिगरेट, सिगार, पान मसाला, गुटखा और अन्य तंबाकू से जुड़े उत्पाद।
लक्जरी वाहन: 1200cc से अधिक इंजन वाली पेट्रोल कारें और 1500cc से अधिक इंजन वाली डीजल कारें।
अन्य: 350cc से अधिक इंजन क्षमता वाली बड़ी मोटरसाइकिलें, प्राइवेट जेट और नौकाएं।
यह कदम सरकार की “सिन गुड्स” पर अधिक कर लगाने की नीति का हिस्सा है, ताकि इनके उपभोग को हतोत्साहित किया जा सके।
ट्रेन यात्रा के लिए जीएसटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

एसी क्लास (AC Classes): एसी कोच (1AC, 2AC, 3AC, AC चेयर कार, और एक्जीक्यूटिव चेयर कार) के टिकट पर पहले की तरह 5% जीएसटी लगता रहेगा।
गैर-एसी क्लास (Non-AC Classes): स्लीपर क्लास और सेकंड सीटिंग (2S) के टिकट पहले की तरह जीएसटी से मुक्त हैं।
एलपीजी सिलेंडर
- एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर भी कोई असर नहीं पड़ा है क्योंकि जीएसटी की दरें अपरिवर्तित हैं।
- घरेलू एलपीजी सिलेंडर: घरेलू उपयोग वाले सिलेंडर पर पहले की तरह 5% जीएसटी लगता रहेगा।
- कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर: वाणिज्यिक उपयोग वाले सिलेंडर पर 18% जीएसटी लगता रहेगा।
रोजमर्रा के सामानों की घटी कीमतें

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद रोजमर्रा के कई सामानों पर टैक्स 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे आम परिवारों के मासिक खर्च में बड़ी बचत होने की उम्मीद है।
यहां उन प्रमुख सामानों की सूची दी गई है जो अब 5% जीएसटी स्लैब में हैं:
किराने का सामान:
पैकेटबंद खाद्य पदार्थ जैसे आटा, चावल, दालें, बिस्किट, नमकीन, भुजिया।
डेयरी उत्पाद जैसे मक्खन, घी, पनीर, दही।
अन्य खाद्य सामग्री जैसे कॉफी, जैम, केचप, सूखे मेवे, आइसक्रीम।
व्यक्तिगत देखभाल और ग्रूमिंग प्रोडक्ट्स:
तेल, साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, टूथब्रश।
टैल्कम पाउडर, शेविंग क्रीम, शेविंग लोशन, आफ्टरशेव।
बेबी प्रोडक्ट्स, जिसमें डायपर भी शामिल हैं।
यह बदलाव, जिसमें रोजमर्रा की लगभग 99% वस्तुओं को कम टैक्स स्लैब में लाया गया है, सीधे तौर पर आम आदमी की बचत में इजाफा करेगा और बाजार में मांग को भी बढ़ावा देगा।
स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी राहत

नई जीएसटी प्रणाली के तहत स्वास्थ्य और चिकित्सा से संबंधित कई उत्पाद और सेवाएं सस्ती हो गई हैं।
दवाइयां: 33 जीवनरक्षक दवाइयां और 3 गंभीर बीमारियों की दवाइयां अब पूरी तरह से टैक्स-फ्री हैं। वहीं, अन्य सभी दवाइयों पर जीएसटी दर 12% से घटकर 5% हो गई है।
मेडिकल उपकरण: डायग्नोस्टिक किट्स और अन्य मेडिकल उपकरण भी कम टैक्स स्लैब में आ गए हैं, जिससे वे अधिक किफायती हो गए हैं।
वेलनेस और ब्यूटी सर्विसेज में कटौती

जीएसटी दरों में कटौती का असर वेलनेस और ब्यूटी इंडस्ट्री पर भी हुआ है।
वेलनेस सर्विसेज: पहले इन सेवाओं पर 18% जीएसटी लगता था, जो अब घटकर केवल 5% रह गया है।
शामिल सेवाएं: इसमें जिम की मेंबरशिप, सैलून में हेयरकट या फेशियल, योग क्लास और स्पा ट्रीटमेंट जैसी सेवाएं शामिल हैं।
यह कदम आम जनता के लिए स्वास्थ्य और जीवन शैली से जुड़ी सुविधाओं को अधिक सुलभ और सस्ता बनाएगा।
होटल और शिक्षा पर राहत

होटल रूम: ₹7,500 तक के होटल रूम टैरिफ पर अब जीएसटी 12% से घटकर 5% हो गया है। इससे पर्यटन और यात्रा करने वाले लोगों को काफी फायदा होगा।
बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी चीजें: बच्चों के लिए स्टेशनरी आइटम जैसे कॉपी, पेंसिल, रबर, क्रेयॉन और शार्पनर अब पूरी तरह टैक्स फ्री हो गए हैं। इसके अलावा, ज्योमेट्री बॉक्स, स्कूल के कार्टन और ट्रे पर भी अब सिर्फ 5% टैक्स लगेगा।
बीमा धारकों के लिए सबसे बड़ी राहत

जीएसटी 2.0 का सबसे बड़ा लाभ बीमा क्षेत्र को मिला है। अब जीवन बीमा और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा। इसमें निम्नलिखित सभी प्रकार की पॉलिसियां शामिल हैं:
जीवन बीमा: टर्म प्लान, यूलिप (ULIP) और एंडोमेंट प्लान।
हेल्थ इंश्योरेंस: फैमिली या सीनियर सिटिजन हेल्थ प्लान।
इस बदलाव से बीमा पॉलिसियां लेना अब और भी सस्ता हो गया है, जिससे लोग आसानी से वित्तीय सुरक्षा और स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित कर सकेंगे।







