बचपन से हमने सुना है कि प्यार अंधा होता है। फिल्मों और कई असल ज़िंदगी की लव स्टोरीज़ ने हमें यकीन दिलाया है कि जब दो लोग प्यार में होते हैं, तो उम्र, हाइट या लुक जैसी चीज़ें मायने नहीं रखतीं। यह बात सुनने में भले ही अच्छी लगे, लेकिन हमारे मन में अक्सर एक सवाल उठता है: क्या रिश्तों में उम्र का अंतर सच में मायने रखता है? और क्या एक खुशहाल और लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते के लिए कोई “परफेक्ट उम्र का गैप” होता है? आइए हम समझाते हैं।
परफेक्ट उम्र के गैप के बारे में साइंस क्या कहता है?
साइंस ने भी इस सवाल का जवाब देने की कोशिश की है। रिसर्च से पता चलता है कि प्यार किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन जब लंबे समय तक खुशी की बात आती है, तो उम्र का अंतर धीरे-धीरे असर डालने लगता है। जर्नल ऑफ़ पॉपुलेशन इकोनॉमिक्स में छपी 2018 की एक स्टडी में 3,000 से ज़्यादा ऑस्ट्रेलियाई कपल्स के डेटा का एनालिसिस किया गया। इन कपल्स को कई सालों तक ट्रैक किया गया ताकि यह समझा जा सके कि उम्र का अंतर रिश्ते की संतुष्टि पर कैसे असर डालता है।
रिसर्च का नतीजा क्या था?
इस रिसर्च के नतीजे काफी दिलचस्प थे। स्टडी के मुताबिक, जैसे-जैसे पार्टनर्स के बीच उम्र का अंतर बढ़ता है, समय के साथ रिश्ते की संतुष्टि कम होती जाती है। जिन कपल्स के बीच उम्र का ज़्यादा गैप था, उनकी लाइफस्टाइल, इमोशनल उम्मीदों और फ्यूचर प्लानिंग में ज़्यादा अंतर दिखा। इसका मतलब यह नहीं है कि जिन रिश्तों में उम्र का ज़्यादा अंतर होता है, वे फेल हो जाते हैं, लेकिन इससे यह पता चलता है कि उम्र रोज़मर्रा की ज़िंदगी के अनुभवों पर असर डालती है, चाहे वह एनर्जी लेवल हो, सोशल लाइफ हो, करियर हो या फ्यूचर के लक्ष्य हों।
तो सही उम्र का गैप क्या है?
तो, साइंस के हिसाब से सही उम्र का गैप क्या है? रिसर्च से पता चलता है कि सबसे ज़्यादा स्टेबल और सैटिस्फाइंग रिश्ते उन कपल्स में पाए जाते हैं जिनकी उम्र का अंतर ज़ीरो से तीन साल के बीच होता है। इसके कारण साफ़ हैं। ऐसे कपल्स अक्सर ज़िंदगी के एक जैसे स्टेज पर होते हैं, जैसे करियर, शादी या फैमिली प्लानिंग। उनके इंटरेस्ट, विचार और डेली रूटीन भी काफी हद तक मिलते-जुलते हैं, जिससे बेहतर कम्पैटिबिलिटी बनती है। स्टडी से यह भी पता चला कि जिन रिश्तों में उम्र का ज़्यादा गैप होता है, उनमें सैटिस्फैक्शन छह से दस साल के बाद तेज़ी से कम हो जाता है, खासकर जब उम्र का अंतर सात साल से ज़्यादा हो। ऐसे मामलों में, अगर आदमी ज़्यादा उम्र का है, तो सैटिस्फैक्शन शुरू में ज़्यादा होता है, लेकिन समय के साथ तेज़ी से कम होता जाता है। वहीं, जिन महिलाओं के पति ज़्यादा उम्र के थे, उन्होंने ओवरऑल सैटिस्फैक्शन कम बताया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जिन रिश्तों में उम्र का ज़्यादा गैप होता है, वे सफल नहीं हो सकते। स्टैटिस्टिक्स सिर्फ़ ट्रेंड्स दिखाते हैं, किसी एक रिश्ते का भविष्य नहीं। समाज में इसके उलट कई उदाहरण हैं।








