30 जुलाई को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक अहम घोषणा की है, जिससे लाखों टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी। अब ITR-3 फॉर्म को इनकम टैक्स की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन भरा जा सकता है। खासतौर से वे लोग जो शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं (जैसे फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स – F&O), बिजनेस करते हैं, या अनलिस्टेड शेयरों में निवेश करते हैं, उनके लिए यह फॉर्म अनिवार्य हो जाता है।
ITR-3 फॉर्म किसके लिए है?
ITR-3 फॉर्म उन व्यक्तियों (Individuals) और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUFs) के लिए है जिनकी आय किसी व्यवसाय या पेशे से होती है। इसे एक “कॉम्प्रिहेंसिव फॉर्म” कहा जाता है क्योंकि इसमें कई तरह की आय को एक ही जगह रिपोर्ट किया जा सकता है।
ITR-3 भरने के पात्र वे लोग हैं जो:
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शेयर ट्रेडिंग (F&O) से कमाते हैं (स्पेक्युलेटिव या नॉन-स्पेक्युलेटिव इनकम)
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अनलिस्टेड इक्विटी शेयर्स में निवेश करते हैं
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किसी फर्म में पार्टनर हैं और प्रोफिट शेयर करते हैं
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वेतन, पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी या अन्य स्रोतों से आय प्राप्त करते हैं
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विदेशी संपत्ति रखते हैं या विदेशों से आय प्राप्त करते हैं
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जिनकी सालाना कुल आय ₹50 लाख से अधिक है
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जो ITR-1, ITR-2 या ITR-4 भरने के पात्र नहीं हैं
ITR-3 में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए हुए मुख्य बदलाव:
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कैपिटल गेन रिपोर्टिंग में बदलाव
अब 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के शॉर्ट टर्म व लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को अलग-अलग रिपोर्ट करना जरूरी है। -
शेयर बायबैक पर नुकसान की रिपोर्टिंग
यदि किसी कंपनी के शेयर बायबैक में पूंजीगत नुकसान हुआ है, तो उसे अब विशेष रूप से दर्शाने की सुविधा दी गई है। -
इनकम लिमिट में बदलाव
अब जिनकी सालाना आय ₹1 करोड़ से ज्यादा है, उन्हें अपनी संपत्ति और लायबिलिटीज (देनदारियों) की विस्तृत जानकारी देनी होगी। पहले यह सीमा ₹50 लाख थी। -
TDS सेक्शन कोड की रिपोर्टिंग
Schedule-TDS में अब TDS काटे जाने वाले सेक्शन कोड को सही-सही भरना अनिवार्य हो गया है। -
टैक्स रिजीम चयन की जानकारी (फॉर्म 10-IEA)
अब करदाता को यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने पिछले साल पुराना या नया टैक्स रिजीम चुना था, और इस वर्ष कौन-सा विकल्प चुना है। -
इंडेक्सेशन की जानकारी
अगर कोई अचल संपत्ति (जैसे जमीन या बिल्डिंग) 23 जुलाई 2024 से पहले बेची गई है, तो उसकी अधिग्रहण लागत और सुधार लागत को अलग से दर्शाना होगा। -
डिविडेंड आय की नई रिपोर्टिंग लाइन
अब कंपनी बायबैक से प्राप्त डिविडेंड आय को Section 2(22)(f) के अंतर्गत अलग लाइन में दर्शाना अनिवार्य हो गया है।








