केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे और ग्वालियर संभाग क्रिकेट संघ (जीडीसीए) के उपाध्यक्ष महान आर्यमन सिंधिया निर्विरोध मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ (एमपीसीए) के अध्यक्ष चुने गए हैं। इसके साथ ही ग्वालियर के पूर्व राजघराने की तीसरी पीढ़ी के 29 वर्षीय इस सदस्य के लिए राज्य क्रिकेट संस्था की कमान संभालने का रास्ता साफ हो गया है। 1957 में स्थापित एमपीसीए के इतिहास में सबसे कम उम्र के अध्यक्ष के रूप में महान आर्यमन संगठन की बागडोर संभालने वाले हैं। एमपीसीए के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (सीएओ) रोहित पंडित ने सोमवार को बताया कि एमपीसीए के चुनावों में अध्यक्ष समेत कार्यकारिणी के सभी पद निर्विरोध चुने गए और इस प्रकार पूरी कार्यकारिणी सर्वसम्मति से चुनी गई है।
उन्होंने बताया कि एमपीसीए की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को 2 सितंबर (मंगलवार) को होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद कार्यकारिणी पदाधिकारी कार्यभार संभालेंगे। पंडित ने बताया कि एमपीसीए की नई कार्यकारिणी में विनीत सेठिया को उपाध्यक्ष, सुधीर असनानी को सचिव, अरुंधति किरकिरे को संयुक्त सचिव और संजीव दुआ को कोषाध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने बताया कि एमपीसीए की प्रबंध समिति के नवनिर्वाचित सदस्यों में संध्या अग्रवाल, प्रसून कनमड़ीकर, राजीव रिसोडकर और विजेश राणा शामिल हैं, जबकि क्रिकेट समिति में प्रदीप बनर्जी, रमणीक पटेल और अभय लघाटे को जगह दी गई है।
एमपीसीए के निवर्तमान अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर ने कहा – पिछले छह वर्षों के दौरान एमपीसीए ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। मुझे उम्मीद है कि महान आर्यमन सिंधिया के नेतृत्व में नवनिर्वाचित कार्यकारिणी एमपीसीए को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। पिछले तीन वर्षों में क्रिकेट के गलियारे में महान आर्यमन की सक्रियता देखी गई है। महान आर्यमन को 2022 में जीडीसीए का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्हें 2022 में ही एमपीसीए का आजीवन सदस्य बनाया गया था। महान आर्यमन राज्य की टी20 क्रिकेट लीग मध्य प्रदेश लीग (एमपीएल) के अध्यक्ष भी हैं।
उन्होंने 2024 में अपने गृहनगर ग्वालियर से एमपीएल की शुरुआत की थी। हालाँकि, सिंधिया परिवार लंबे समय से राज्य के क्रिकेट प्रशासन में रहा है और पिछले कई दशकों से एमपीसीए पर इसी परिवार का दबदबा रहा है। महान आर्यमन के दिवंगत दादा माधवराव सिंधिया और उनके पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया भी एमपीसीए के अध्यक्ष रह चुके हैं। मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 15 साल पहले एमपीसीए में सिंधिया परिवार के वर्चस्व को चुनौती दी थी। 2010 के एमपीसीए चुनावों में ज्योतिरादित्य सिंधिया और कैलाश विजयवर्गीय के बीच सीधा मुकाबला हुआ था।
कांटे की टक्कर वाले इन चुनावों में, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एमपीसीए अध्यक्ष पद के लिए विजयवर्गीय को 70 मतों से हराया। इन चुनावों में, शक्तिशाली सिंधिया खेमे ने नवगठित विजयवर्गीय गुट को हराकर कार्यकारिणी के सभी प्रमुख पदों पर कब्जा कर लिया। उस समय, ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री थे, जबकि विजयवर्गीय राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार में इसी विभाग के कैबिनेट मंत्री का पद संभाल रहे थे।
लोढ़ा समिति की सिफारिशों के कारण, ज्योतिरादित्य सिंधिया और संजय जगदाले जैसे वरिष्ठ क्रिकेट प्रशासकों को जनवरी 2017 में एमपीसीए में अपने महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा देना पड़ा था क्योंकि वे दोनों नौ वर्षों से अधिक समय से इस संगठन की प्रबंधन समिति में अलग-अलग पदों पर थे। परिणामस्वरूप, वे लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुसार इस संगठन में पद धारण करने के लिए अयोग्य हो गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। एमपीसीए में कैलाश विजयवर्गीय गुट और ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के बीच कलह पहले ही समाप्त हो चुकी है।







