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क्या सच में दिमाग से शरीर को कंट्रोल कर पाएंगे? एलन मस्क ने Neuralink के लिए बताया अपना पूरा प्लान

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दुनिया के मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट एलन मस्क ने एक बार फिर अपनी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफ़ेस कंपनी न्यूरालिंक को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। मस्क का कहना है कि यह टेक्नोलॉजी भविष्य में पूरे शरीर के फंक्शन को ठीक कर सकती है। उनका यह दावा खासकर रीढ़ की हड्डी में चोट लगने वाले लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण है, जो चल नहीं पाते हैं।

यह ब्रेकथ्रू मोटर कॉर्टेक्स पर आधारित है
एलन मस्क के अनुसार, न्यूरालिंक का नया ब्रेकथ्रू दिमाग के उस हिस्से पर काम करता है जिसे मोटर कॉर्टेक्स कहते हैं। यह वह हिस्सा है जो हमारे शरीर की हरकतों को कंट्रोल करता है। अगर रीढ़ की हड्डी के किसी भी हिस्से में नसें कट जाती हैं, तो दिमाग और शरीर के बीच का कनेक्शन टूट जाता है। न्यूरालिंक इस टूटे हुए कम्युनिकेशन को फिर से जोड़ने का काम करता है।

दिमाग और शरीर के बीच कनेक्शन फिर से बनाना
मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उन्हें अब पूरा भरोसा है कि न्यूरालिंक के ज़रिए पूरे शरीर के फंक्शन को ठीक करना मुमकिन है। उन्होंने बताया कि यह टेक्नोलॉजी दिमाग से सिग्नल को गर्दन या रीढ़ की हड्डी में जहां नसें डैमेज हुई हैं, उस जगह से आगे भेजने में मदद करती है। उनके मुताबिक, फिजिक्स के नज़रिए से यह पूरी तरह से मुमकिन है।

2022 से इंसानों पर टेस्टिंग जारी
एलन मस्क ने 2022 में न्यूरालिंक की मोटर कॉर्टेक्स टेक्नोलॉजी की घोषणा की थी। उसी साल इंसानों पर ट्रायल भी शुरू हो गए थे। कंपनी का इम्प्लांट एक छोटी चिप जैसा है जिसे खोपड़ी की हड्डी के एक हिस्से की जगह लगाया जाता है। यह चिप बहुत पतले, धागे जैसे इलेक्ट्रोड के ज़रिए सीधे दिमाग से जुड़ती है।

न्यूरालिंक का N1 इम्प्लांट क्या है?
कंपनी के अनुसार, न्यूरालिंक के N1 इम्प्लांट में कुल 1,024 इलेक्ट्रोड हैं, जो 64 बहुत पतले धागों में बंटे हुए हैं। ये इलेक्ट्रोड दिमाग के अंदर सिग्नल पढ़ते और भेजते हैं। सितंबर में, न्यूरालिंक ने घोषणा की कि यह डिवाइस अब तक 12 मरीज़ों में सफलतापूर्वक इम्प्लांट किया जा चुका है।

देखने की क्षमता वापस लाने की दिशा में एक बड़ा कदम
न्यूरालिंक न सिर्फ शरीर की हरकतों को ठीक करने में तेज़ी से तरक्की कर रहा है, बल्कि देखने की क्षमता वापस लाने में भी। जनवरी की शुरुआत में, कंपनी ने घोषणा की कि वह एक खास ब्रेन चिप पर काम कर रही है जिससे उन लोगों को फायदा हो सकता है जिनकी आंखों की रोशनी चली गई है। इस डिवाइस को ब्लाइंडसाइट कहा जाता है।

FDA से महत्वपूर्ण पदनाम मिला
ब्लाइंडसाइट को सितंबर 2024 में US FDA से “ब्रेकथ्रू डिवाइस” का पदनाम मिला। एलन मस्क का कहना है कि यह चिप उन लोगों की भी मदद कर सकती है जो जन्म से अंधे हैं, बशर्ते उनका विज़ुअल कॉर्टेक्स सही हो।

2026 के लिए प्लान
एलन मस्क के अनुसार, न्यूरालिंक 2026 में ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफ़ेस डिवाइस का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू करेगा। कंपनी सर्जिकल प्रोसीजर को भी लगभग पूरी तरह से ऑटोमेटेड बनाने का प्लान बना रही है। अगर मस्क के दावे सच होते हैं, तो यह मेडिकल साइंस के इतिहास में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है।

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