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नए लेबर कोड लागू 48 घंटे वर्क वीक सैलरी और ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव

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देश में श्रम सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने नए लेबर कोड के सभी नियमों को नोटिफाई कर दिया है। इन नए नियमों के लागू होने के बाद वर्किंग कल्चर सैलरी स्ट्रक्चर पीएफ और ग्रेच्युटी से जुड़े कई अहम बदलाव देखने को मिलेंगे। खास बात यह है कि अब औपचारिक रूप से 48 घंटे के वर्क वीक को मान्यता दी गई है।

48 घंटे वर्क वीक को मिली मंजूरी

नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों के लिए साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे तय किया गया है। इसका मतलब है कि कंपनियां अधिकतम 6 दिन के काम के हिसाब से शेड्यूल तैयार कर सकेंगी जिसमें दैनिक कार्य घंटों की सीमा तय नियमों के अनुसार लागू होगी।सरकार का मानना है कि यह बदलाव श्रमिकों की उत्पादकता और कार्य जीवन संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव

नए नियमों के तहत कुल सीटीसी और बेसिक सैलरी की संरचना को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब कई मामलों में बेसिक सैलरी कुल वेतन का बड़ा हिस्सा होगी जिससे पीएफ और अन्य सामाजिक सुरक्षा योगदान बढ़ सकता है। इसका सीधा असर कर्मचारियों की इन हैंड सैलरी पर भी पड़ सकता है क्योंकि पीएफ और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ने की संभावना है।

पीएफ और सामाजिक सुरक्षा को लेकर नया ढांचा

नए लेबर कोड में प्रोविडेंट फंड को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। अधिक बेसिक सैलरी के कारण पीएफ में योगदान बढ़ेगा जिससे कर्मचारियों को लंबी अवधि में बेहतर रिटायरमेंट बेनिफिट मिल सकेगा। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी और व्यापक बनाया गया है ताकि असंगठित और गिग वर्कर्स को भी सुरक्षा कवरेज मिल सके।

ग्रेच्युटी नियमों में भी बदलाव

नए नियमों के तहत ग्रेच्युटी की पात्रता और गणना प्रणाली में बदलाव किया गया है। अब कुछ मामलों में कम समय में भी ग्रेच्युटी के लाभ मिलने का रास्ता साफ किया गया है जिससे नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

नौकरी और छंटनी नियमों में सुधार

नए लेबर कोड में हायरिंग और लेऑफ यानी छंटनी नियमों को भी सरल और पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है। कंपनियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान की गई है जबकि कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है।

उद्योग जगत की प्रतिक्रिया

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार भारत के लेबर मार्केट को अधिक आधुनिक और निवेश अनुकूल बनाएंगे। हालांकि कुछ कर्मचारी संगठनों ने सैलरी स्ट्रक्चर बदलाव को लेकर चिंता भी जताई है।

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