मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान संघर्ष की लपटें अब भारतीय एयरलाइंस तक पहुँच गई हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने भारतीय विमानन कंपनियों को पंगु बना दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने केंद्र सरकार से ‘SOS’ (आपातकालीन सहायता) की गुहार लगाई है, और चेतावनी दी है कि यदि तत्काल सहायता नहीं मिली, तो वे अपने परिचालन को बंद करने की कगार पर पहुँच सकती हैं।
ईंधन की कीमतों ने बजट पर कहर बरपाया
नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे एक पत्र में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने चेतावनी दी है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में “अन्यायपूर्ण वृद्धि” एयरलाइंस को अपूरणीय वित्तीय क्षति पहुँचा रही है। यह ध्यान देने योग्य है कि किसी भी एयरलाइन के परिचालन के लिए, अकेले ईंधन ही उसके कुल खर्च का 40 प्रतिशत होता है।
अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर ₹73 की भारी वृद्धि
एयरलाइंस ने बताया है कि जहाँ सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में वृद्धि को ₹15 प्रति लीटर तक सीमित कर दिया है, वहीं अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए ₹73 प्रति लीटर की भारी वृद्धि लागू की है। इसके अलावा, रुपये के गिरते मूल्य और 11% उत्पाद शुल्क ने आग में घी डालने का ही काम किया है।
इस संकट का कारण क्या है?
इस गंभीर संकट का तात्कालिक मूल कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार की जीवनरेखा का काम करता है; दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ईरान ने इस मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे सऊदी अरब, कतर और UAE जैसे देशों से तेल का प्रवाह रुक गया है। परिणामस्वरूप, आपूर्ति में इस व्यवधान के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं।
इसका यात्रियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
FIA ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईंधन की कीमतें कम नहीं हुईं, तो एयरलाइंस को अपनी उड़ान सेवाओं को निलंबित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इसका सीधा परिणाम बड़ी संख्या में उड़ानों का रद्द होना और हवाई किराए की कीमतों में भारी वृद्धि होना होगा। आने वाले दिन लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।
सरकार से क्या मांग है?
एयरलाइंस ने सरकार से तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने विमानन क्षेत्र को ढहने से बचाने के लिए ‘क्रैक बैंड’ व्यवस्था को फिर से लागू करने और उत्पाद शुल्क से अस्थायी छूट देने की अपील की है। ‘क्रैक बैंड’ ATF (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के लिए एक मूल्य निर्धारण व्यवस्था है, जो कच्चे तेल और ATF की कीमतों के बीच अत्यधिक अंतर को रोकती है।








